शहर में मरीजों, बुजुर्गों की देखभाल के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसियों को उनका पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा
भोपाल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की केयरटेकर द्वारा निर्मम हत्या के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। इस वारदात ने शहर में घरों में काम करने वाले कर्मचारियों, विशेषकर केयरटेकर और मरीजों की देखभाल करने वाले सहायकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी के मद्देनजर, पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत एक कड़ा आदेश जारी किया है, जो शहर में इस तरह के कर्मचारियों की नियुक्ति और उनके सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाता है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर अगले दो महीनों तक शहर में लागू रहेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों और बीमारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नए आदेश के तहत, अब किसी भी निजी एजेंसी के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह किसी भी कर्मचारी को घर में सेवा देने के लिए भेजने से पहले संबंधित थाने से उसका पुलिस वेरिफिकेशन कराए। इस प्रक्रिया में कर्मचारी का पूरा विवरण, जैसे कि नाम, जन्मतिथि, स्थायी और वर्तमान पता, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र और हालिया फोटो पुलिस को उपलब्ध कराना होगा। यह सत्यापन न केवल शहर के निवासियों के लिए, बल्कि दूसरे जिलों या राज्यों से आने वाले कर्मचारियों के लिए भी आवश्यक होगा। जरूरत पड़ने पर, पुलिस कर्मचारी के पिछले रोजगार और कार्य अनुभव की भी जांच कर सकती है, ताकि उनकी विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। इस कदम से ऐसे कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की गहन जांच संभव होगी, जो संवेदनशील घरेलू वातावरण में काम करते हैं। कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले उनकी पहचान और पते की जांच के अलावा, अब एजेंसियों को मरीज या उनके परिजनों को कर्मचारी के बारे में विस्तृत जानकारी देनी होगी। इस जानकारी में कर्मचारी का नाम, फोटो, मोबाइल नंबर, वह किस प्रकार की सेवा देगा, उसके आने का समय और एजेंसी का संपर्क नंबर शामिल होगा। हर कर्मचारी को एक फोटो युक्त संस्थागत पहचान पत्र भी साथ रखना होगा, जिस पर उसका नाम, फोटो, कर्मचारी क्रमांक और संस्था का नाम स्पष्ट रूप से अंकित होगा। यदि किसी कारणवश कर्मचारी को बदलना पड़ता है, तो इसकी सूचना मरीज या उसके परिजनों को अग्रिम रूप से देनी होगी। नए कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन भी उतना ही अनिवार्य होगा जितना पहले वाले का था, ताकि सेवा की निरंतरता और सुरक्षा बनी रहे। पुलिस ने सेवा प्रदान करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय की है। इन एजेंसियों को अपने कर्मचारियों की नियुक्ति, उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के प्रकार, कार्यस्थल और सेवा समाप्ति तक का पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से रखना होगा। यह रिकॉर्ड इस बात का विवरण भी देगा कि किस कर्मचारी को किस मरीज के घर भेजा गया, वह कब पहुंचा और कब वापस लौटा। इस पारदर्शिता से किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जवाबदेही तय करना आसान हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को अपने साथ किसी भी अनजान व्यक्ति को मरीज के घर ले जाने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि मरीज या परिजनों से पहले अनुमति न ली गई हो। यह नियम मरीजों की सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। प्रत्येक एजेंसी को एक जिम्मेदार अधिकारी भी नियुक्त करना होगा, जो कर्मचारियों के सत्यापन, प्राप्त शिकायतों के निवारण और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए उत्तरदायी होगा। यह अधिकारी पुलिस और एजेंसी के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करेगा, जिससे संचार सुगम होगा और समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी शिकायत या समस्या को गंभीरता से लिया जाए और उसका उचित समाधान हो। इस व्यवस्था से एजेंसियों पर भी बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और वे अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सजग होंगी। नर्सिंग और मेडिकल देखभाल जैसी विशेष सेवाएं प्रदान करने वाली संस्थाओं के लिए, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उन्हें संबंधित कानूनों के अनुसार आवश्यक पंजीकरण और लाइसेंस प्राप्त करना होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि केवल योग्य और प्रशिक्षित व्यक्ति ही इन संवेदनशील भूमिकाओं में काम कर सकें। कर्मचारियों को उनकी योग्यता और प्रशिक्षण के अनुसार ही कार्य सौंपा जाएगा। बिना आवश्यक कौशल या प्रशिक्षण वाले किसी भी कर्मचारी को ऐसे काम नहीं दिए जाएंगे जिनके लिए विशेष विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और मरीजों को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण है। एजेंसियों को सुरक्षा से जुड़ी एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार करनी होगी। इस एसओपी में कार्यालय का पता, संपर्क नंबर, ई-मेल और शिकायत अधिकारी की जानकारी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करनी होगी, ताकि जरूरतमंद लोग आसानी से संपर्क कर सकें। मरीजों की सुरक्षा, गोपनीयता और गरिमा को सर्वोपरि रखना होगा।

