बुंदेलखंड को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के उद्देश्य से उद्यानिकी फसलों के क्लस्टर विकास और फसल विविधीकरण पर जोर दिया जा रहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता ने संभागीय समीक्षा बैठक में कहा कि कृषि को फूड प्रोसेसिंग, उद्योगों और उद्यानिकी से जोड़कर किसानों की समृद्धि के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश शासन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में इस वर्ष को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मना रहा है, और मुख्यमंत्री द्वारा किसान हितैषी कार्य किए जा रहे हैं। प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि इन योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। बैठक में कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण विभागों की गतिविधियों और योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। सहकारिता विभाग की समीक्षा के दौरान केसी गुप्ता ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे सहकारी बैंकों के एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) को समयबद्ध तरीके से कम करके शून्य पर लाएं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बैंकों की अंशपूंजी बढ़ाने, डिफॉल्टर और कालातीत किसानों से ऋण वसूली करने तथा वसूल की गई राशि को समितियों में जमा कराने के निर्देश भी दिए। सहकारिता आयुक्त-सह-पंजीयक दीपक सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को अधिक से अधिक ऋण वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें व्यावसायिक बैंकों का रुख न करना पड़े। उन्होंने दुग्ध समितियों और उनके सदस्यों के सहकारी बैंकों में खाते खुलवाने के लिए एक महीने का अभियान चलाकर यह कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। सहकारी बैंकों की कमजोर वित्तीय स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि बैंकों की आर्थिक स्थिति में सुधार से किसानों को अधिक लाभ मिलेगा। दीपक सिंह ने सहकारिता के अंतर्गत डीसीडीसी और डीएलआईएमसी की नियमित बैठकें आयोजित करने, वर्ष 2027-28 के लिए फसल ऋणमानों की अनुशंसा हेतु जिला स्तरीय तकनीकी समूह की बैठक करने तथा गबन और धोखाधड़ी के प्रकरणों की त्रैमासिक समीक्षा करने के निर्देश दिए। आहूजा ने सागर संभाग में पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी) के माध्यम से नवीन व्यवसाय प्रारंभ करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में राज्य शासन की ऋण सरलीकरण योजना और कवच योजना की जानकारी भी दी गई। उद्यानिकी फसलों के रकबे को बढ़ाने और किसानों को इन गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संचालक उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण सौरभ कुमार सुमन ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए बताया कि देश के कुल कृषि क्षेत्र के लगभग 16 प्रतिशत हिस्से में उद्यानिकी फसलें उगाई जाती हैं, जबकि मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 9.5 प्रतिशत है। उन्होंने संभाग में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने के निर्देश दिए। सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि कम लागत और कम जगह में उद्यानिकी प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं। इसके लिए प्रगतिशील किसानों और उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए उद्यानिकी विभाग की अनुदान योजनाओं का अधिक से अधिक किसानों को लाभ दिलाने पर भी जोर दिया। सब्जी, फल, फूल और मसाला उत्पादन तथा प्रसंस्करण के लिए 1000 हेक्टेयर के क्लस्टर तैयार कर गतिविधियां संचालित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना) का नेटवर्क बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत बरबड़े ने कहा कि प्रेशराइज्ड इरिगेशन सिस्टम (दबावयुक्त सिंचाई प्रणाली) और सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों के प्रचार-प्रसार के लिए गांवों में शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों में किसानों से आवेदन लेकर संयंत्र शुरू किए जाएं। उन्होंने फसलोत्तर प्रबंधन के अंतर्गत फार्म गेट पैक हाउस, कूलिंग यूनिट, कोल्ड स्टोर और राइपनिंग चैंबर स्थापित करने के लिए उद्यमियों को अनुदान योजनाओं का लाभ लेने हेतु प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए। कम वर्षा और कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ड्रिप, स्प्रिंकलर, शेडनेट और अन्य सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता बताई गई। किसानों को उद्यानिकी फसलों और संबंधित योजनाओं की जानकारी देने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएं, जिनमें सफल किसानों, बैंकों के प्रतिनिधियों, कृषि वैज्ञानिकों और किसान संगठनों को आमंत्रित किया जाए। निशांत बरबड़े ने कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान संभाग में वर्ष 2026-27 के लिए फसलवार क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने जल परियोजनाओं की संख्या, कुल क्षमता तथा जलाशयों और बांधों में जलभराव की स्थिति की भी समीक्षा की। कृषि संबंधी स्थायी समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने और रबी फसलों के लिए किस्मवार बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कम पानी वाले क्षेत्रों में किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें अपनाने तथा फसल विविधीकरण के लिए जागरूक करने पर जोर दिया गया। इस अभियान में किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों को भी जोड़ने के निर्देश दिए गए। अधिक मात्रा में यूरिया लेने वाले किसानों का सत्यापन किया जाना चाहिए।
समाचार
किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी फसलों के क्लस्टर विकास व फसल विविधीकरण पर जोर
6 नवंबर 2026 को 11:08 pm बजे
किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी फसलों के क्लस्टर विकास व फसल विविधीकरण पर जोर
साझा करेंWhatsApp
