स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट खत्म करने की कार्रवाई में उज्जैन संभाग का आंकड़ा पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा सामने आया है। राजधानी भोपाल और इंदौर जैसे बड़े संभाग भी इस मामले में पीछे छूट गए हैं। क्षेत्रीय संचालकों की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन संभाग में 626 अटैचमेंट खत्म किए गए, जबकि भोपाल में 434 और इंदौर में 329 मामले सामने आए। संभाग के भीतर उज्जैन जिला भी सबसे आगे रहा, जहां तीन दिन में 233 डॉक्टरों और कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर लौटने के निर्देश दिए गए। यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह उठता है कि आखिर उज्जैन में इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों और कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना से हटाकर दूसरी जगह क्यों अटैच करना पड़ा? क्या अस्पतालों में स्टाफ की जरूरत पूरी करने के लिए नियमित नियुक्तियां नहीं थीं? यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि किस आधार पर डॉक्टरों और कर्मचारियों को अटैच किया गया और क्या इसके लिए कोई उचित प्रक्रिया अपनाई गई थी। अटैचमेंट की इस व्यवस्था ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अटैचमेंट की यह प्रक्रिया न केवल प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा सकता है। इससे मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
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स्वास्थ्य विभाग: उज्जैन अव्वल, अटैचमेंट खत्म
31 अक्टूबर 2026 को 10:52 pm बजे

स्वास्थ्य विभाग: उज्जैन अव्वल, अटैचमेंट खत्म
