चार जून, 2007 की भीषण गर्मी में दिल्ली की सड़कों पर अचानक यातायात रोक दिया गया, जब ब्राजील के तत्कालीन राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा राजघाट पहुंचने वाले थे। यह दौरा सामान्य से कुछ अलग था, क्योंकि लूला ने महात्मा गांधी की समाधि पर सिर्फ कुछ मिनटों के बजाय लगभग आधे घंटे का समय बिताया। उन्होंने गांधी जी के जीवन, संघर्षों और विचारों के बारे में विस्तार से पूछताछ की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि गांधी उनके लिए केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि गहरी प्रेरणा के स्रोत थे। विजिटर बुक में उन्होंने लिखा कि शांति के दूत महात्मा गांधी की समाधि पर आकर उन्हें बेहतर महसूस हुआ और गांधी जी के जीवन का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह पहली बार नहीं था जब लूला भारत आए थे; वह पहले भी गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए, और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भारत का दौरा कर चुके थे। उनकी पहली राष्ट्रपति स्तरीय यात्रा जनवरी 2004 में हुई थी, जब वे भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे। यह सम्मान उन देशों के नेताओं को दिया जाता है जिनके साथ भारत मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते बनाना चाहता है। 2004 की यात्रा विशेष थी क्योंकि उनके साथ ब्राजील के 100 प्रमुख कारोबारी आए थे, जो 78 अलग-अलग कंपनियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। लूला ने हमेशा भारत और ब्राजील के बीच आपसी व्यापार को बढ़ावा देने की वकालत की है। दोनों देशों के बीच कृषि, खनन, ऊर्जा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, संचार और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग जारी है। वे ब्रिक्स समूह के सदस्य भी हैं। लूला जब भी भारत आए, उन्होंने अपने व्यवहार और ज्ञान से भारतीय नेताओं, कारोबारियों और आम लोगों को प्रभावित किया। वे सबसे मित्रवत भाव से मिलना पसंद करते थे और राजघाट में उन्होंने वहां काम करने वाले कर्मचारियों से भी हाथ मिलाया था। गरीबी को करीब से देखने के कारण लूला की सोच हमेशा गरीबों और वंचितों के पक्ष में रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट देने का पुरजोर समर्थन किया है। उन्हें 2012 में शांति और निरस्त्रीकरण के लिए 'इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था, जब वे ब्राजील के राष्ट्रपति नहीं थे। यह पुरस्कार उन्हें ब्राजील में गरीबी उन्मूलन और विकास कार्यों को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए दिया गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने लूला के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा था कि उनके देश के दो करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल सके। लूला ने सामाजिक कल्याण और गरीबों के जीवन में सुधार को अपनी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया, जिसकी वजह से भारत में भी उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी जो विकास के साथ सामाजिक न्याय की बात करता है। ब्राजील, जो लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और भारत, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, के बीच एक स्वाभाविक समानता है। दोनों देश चाहते हैं कि वैश्विक निर्णयों में विकासशील देशों की भी बराबर की आवाज हो। इस साझेदारी का असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इस वर्ष 18 से 22 फरवरी तक लूला भारत की राजकीय यात्रा पर थे और इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट में शामिल हुए। उनके साथ ब्राजील का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आया था, जिसमें 11 मंत्री और करीब 300 कारोबारी प्रतिनिधि शामिल थे। यह यात्रा भारत और ब्राजील के संबंधों को नई दिशा देने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार, तकनीक और विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण रही। यह यात्रा भारत और ब्राजील के संबंधों को नई दिशा देने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार, तकनीक और विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। भारत के फुटबॉल प्रेमी ब्राजील की फुटबॉल टीम और उसके सितारों को हमेशा चीयर करते रहे हैं।
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ब्राजील के राष्ट्रपति लूला की भारत से गहरी दोस्ती, कई बार कर चुके हैं यात्राएं
31 अक्टूबर 2026 को 10:52 pm बजे

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला की भारत से गहरी दोस्ती, कई बार कर चुके हैं यात्राएं
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