पश्चिम मध्य रेलवे ने 30 अक्टूबर को प्रेस को सूचना दी, जिससे जनता तक जानकारी पहुँचने में देर हुई
भोपाल मंडल के अधिकारियों ने औबेदुल्लागंज-भोपाल रेलखंड पर स्थित समपार फाटक क्रमांक 238च को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बंद कर दिया। यह फाटक किमी 791/09-11 पर स्थित है और औबेदुल्लागंज से भोपाल के बीच कई ग्रामीण इलाकों के निवासियों के लिए शहर आने-जाने का मुख्य मार्ग है। इस मनमानी से फेस्टिव सीजन में प्रभावित ग्रामीण दुकानदार और ग्राहक दोनों ही परेशान हो रहे हैं। रेलवे ने जनता को तीन दिन बाद यह जानकारी दी कि फाटक 28 अक्टूबर को बंद किया गया था और अब यह 2 नवंबर तक बंद रहेगा। इससे 3 नवंबर को ही यातायात सामान्य हो सकेगा। पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारियों ने 30 अक्टूबर को दोपहर 12:56 बजे प्रेस को इस बंदी की सूचना दी। इसका मतलब है कि यह जानकारी आम जनता तक 30 अक्टूबर की शाम तक ही पहुँच पाएगी। तीन दिनों तक जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ी, लेकिन रेलवे अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। इस तरह की मनमानीपूर्ण कार्रवाई से पहले रेलवे अधिकारियों को यह सोचना चाहिए कि उनकी ट्रेनें किस जमीन पर दौड़ रही हैं, जिस पर किसान खेती करते हैं। समपार फाटक 238च का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह मुख्य रूप से भोपाल और औबेदुल्लागंज के बीच स्थित ग्रामीण क्षेत्रों, वन क्षेत्रों, छोटी बस्तियों और खेतों को आपस में जोड़ता है। इस क्षेत्र के आसपास कई छोटे गांव और मजरे-टोले हैं जो स्थानीय आवागमन, कृषि कार्यों और संपर्क मार्गों के लिए इसी फाटक का उपयोग करते हैं। रेलवे ने फाटक बंद करने से पहले किसी भी वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की। साथ ही, इस फाटक का उपयोग करने वाले लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं दी गई। यह फेस्टिव सीजन का समय है, जब गांव के लोग अपने उत्पाद बाजार में ला रहे हैं। यह वह समय होता है जब वे अपने त्योहारों और परिवार के लिए पैसा कमा सकते हैं। रेलवे द्वारा फाटक को अचानक बंद करने की कार्रवाई ने न केवल गरीब ग्रामीणों के पेट पर लात मारी है, बल्कि यह नरेंद्र मोदी सरकार के 'स्वदेशी' को बढ़ावा देने के प्रयासों में भी बाधा डाल रही है। इस फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों की आजीविका पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। रेलवे की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में भारी रोष है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि बिना पूर्व सूचना के अचानक इस तरह के फैसले कैसे लिए जा सकते हैं। यह स्थिति खासकर उन लोगों के लिए मुश्किल खड़ी कर रही है जो दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं और जिनका आवागमन इस फाटक पर निर्भर करता है। यह उम्मीद की जा रही है कि रेलवे अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे और जल्द से जल्द फाटक को फिर से खोलेंगे। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए उचित पूर्व सूचना प्रणाली लागू की जानी चाहिए ताकि आम जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े।
