नीमच में कृषि महोत्सव: मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधा संवाद किया और आय बढ़ाने के साधनों पर जोर दिया
नीमच जिले में 10 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक और जैविक खेती हो रही है, जबकि सिंचाई परियोजनाओं से 67 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि नीमच जिला उन्नत कृषि, आधुनिक खेती और कृषि व्यापार के क्षेत्र में प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। उन्होंने खंडवा जिले से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नीमच में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता करते हुए किसानों से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और कृषि को आधारशिला बताया। उन्होंने कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों से कृषि गतिविधियों, शासन की किसान हितैषी योजनाओं से मिल रहे लाभ, कृषि क्षेत्र में नवाचार तथा किसानों की आवश्यकताओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री यादव ने जोर दिया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन को भी बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गांधीसागर जलाशय सहित जिले में मत्स्य उत्पादन से जुड़े परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। उन्होंने प्रगतिशील किसानों को प्रोत्साहित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, फसल विविधीकरण तथा कृषि के साथ अन्य गतिविधियों को जोड़कर आय में वृद्धि करने का आह्वान किया। नीमच जिले में 10 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है और गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित कृषि उत्पादों का उत्पादन होता है। इस मंडी की औषधीय फसलों के व्यापार के लिए एशिया के प्रमुख केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान है, जहाँ अश्वगंधा, इसबगोल, तुलसी, सतावरी, चिरायता, आंवला, बहेड़ा और नीम सहित विभिन्न औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। मुख्यमंत्री यादव ने नीमच जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए संचालित हो रही परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रामपुरा-मनासा सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना से 212 गांवों की 67 हजार हैक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित हो सकेगी। इसी प्रकार जावद-नीमच और खुमान सिंह शिवाजी सिंचाई योजनाओं के पूर्ण होने से एक लाख हैक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।

