76 लाख की राशि गैर-साझेदार से ली गई, 22 दिन देर से जमा हुई राशि
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने पूर्व उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) दीपांम रायचुरा को शराब लाइसेंस प्रक्रिया के उल्लंघन, फर्जी ई-एफडीआर के इस्तेमाल, अनधिकृत निजी बैंक से सुरक्षा जमा राशि लेना, फर्म के गैर-साझेदार से बैंक सुरक्षा जमा लेना और विभाग को वित्तीय संकट में डालने के आरोपों में सोमवार को निलंबित कर दिया। रायचुरा उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय में तैनात थे। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक रिपोर्ट सामने आई कि रायचुरा ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भोपाल में दो शराब की दुकानें दिलाने के लिए रोहित गोगा को फायदा पहुंचाया था। इस रिपोर्ट के बाद 9 अक्टूबर को उन्हें पद से हटा दिया गया था। हटाए जाने के बाद उनके खिलाफ जांच शुरू की गई थी। जांच रिपोर्ट में यह संकेत मिला कि पूर्व सहायक आबकारी आयुक्त दीपांम रायचुरा ने वित्तीय अनियमितताएं की थीं और सरकारी प्रक्रियाओं को दरकिनार किया था। यह पाया गया कि भोपाल में दुकान लेने के लिए एक निजी बैंक की 2,75,53,535 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) कार्यालय में जमा की गई थी। जब सत्यापन किया गया, तो बैंक ने जवाब दिया कि उसने मई 2024 में ऐसी कोई एफडी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था। उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया क्योंकि यह तय किया गया था कि निजी बैंकों की एफडीआर नहीं ली जाएगी, लेकिन उन्होंने ठीक वैसा ही किया। यह भी पाया गया कि दुकान के पट्टेदार ने 1,37,79,798 रुपये की आधी राशि जमा की थी और शेष राशि निर्धारित तारीख से 22 दिन बाद जमा की गई थी, जो सुरक्षा जमा राशि के नियमों का उल्लंघन था। सिर्फ यही नहीं, राशि उस व्यक्ति द्वारा जमा की गई थी जो फर्म डीड का सदस्य या साझेदार नहीं था। अधिकारी ने उस व्यक्ति से 76 लाख रुपये की राशि स्वीकार की जो फर्म का सदस्य नहीं था। उन्होंने शराब लाइसेंस से संबंधित नहीं, बल्कि पोस्ट-डेटेड चेक भी स्वीकार किए। इन कई अनियमितताओं के बाद, रायचुरा को आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने निलंबित कर दिया और आगे के आदेशों तक ग्वालियर कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। इस मामले में आगे की जांच जारी है और सरकारी प्रक्रियाओं के उल्लंघन के संबंध में अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है।
