यह कार्रवाई 12 अक्टूबर को निरीक्षण के बाद मिली शिकायतों पर हुई
पन्ना टाइगर रिजर्व
वनरक्षक के निलंबन से यह संदेश जाता है कि पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन अपने कर्मचारियों से उच्च स्तर की व्यावसायिकता और कर्तव्यनिष्ठा की अपेक्षा करता है। यह कार्रवाई न केवल रामपाल प्रजापति के लिए एक सबक है, बल्कि पूरे वन विभाग के लिए एक मिसाल भी है। उम्मीद है कि इस घटना के बाद, कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक जिम्मेदार और सतर्क रहेंगे। यह निलंबन पन्ना टाइगर रिजर्व के समग्र प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है। प्रबंधन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि रिजर्व के भीतर सभी गतिविधियां निर्धारित नियमों और विनियमों के अनुसार हों। वन संपदा और वन्यजीवों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए कड़े अनुशासनात्मक उपाय आवश्यक हैं। इस पूरी प्रक्रिया में, पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक ने त्वरित निर्णय लेते हुए मामले की गंभीरता को समझा और तत्काल कार्रवाई की। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने वनरक्षक रामपाल प्रजापति को पदीय कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई 12 अक्टूबर को किए गए निरीक्षण के दौरान मिली शिकायतों और रिपोर्ट के आधार पर की गई है। प्रजापति मड़ियादो बफर परिक्षेत्र में वनरक्षक के पद पर तैनात थे। निलंबन आदेश जारी होने के बाद, उन्हें केन घड़ियाल अभ्यारण्य, खजुराहो के परिक्षेत्र कार्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है, जहाँ वे निर्वाह भत्ता प्राप्त करेंगे। यह मामला तब प्रकाश में आया जब अधीक्षक, केन घड़ियाल अभ्यारण्य खजुराहो ने प्रबंधन को एक पत्र के माध्यम से सूचित किया। पत्र में बताया गया था कि 12 अक्टूबर को स्टाफ के साथ बीट बर्धा के कक्ष क्रमांक आरएफ-65 का निरीक्षण किया गया था। इस निरीक्षण के दौरान, यह पाया गया कि वनरक्षक रामपाल प्रजापति ने अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती है। निरीक्षण रिपोर्ट और प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक ने तुरंत निलंबन के आदेश जारी कर दिए। वनरक्षक रामपाल प्रजापति के निलंबन का निर्णय पन्ना टाइगर रिजर्व के प्रबंधन द्वारा अनुशासन और कर्तव्यों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह घटना उन अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है जो अपने पद की जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लेते। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वन संपदा की सुरक्षा और प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निलंबन की अवधि में, रामपाल प्रजापति को केन घड़ियाल अभ्यारण्य, खजुराहो के परिक्षेत्र कार्यालय में अपनी सेवाएं देनी होंगी। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
केन घड़ियाल अभ्यारण्य, खजुराहो, जो कि पन्ना टाइगर रिजर्व का ही एक हिस्सा है, घड़ियालों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
