ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए तरीके सामने आ रहे हैं, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है
साइबर ठगों का नेटवर्क इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब पर सक्रिय, फर्जी ऐप्स के जरिए लोगों को बना रहे शिकार
मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। भोपाल शहर में जालसाजों ने ऑनलाइन खरीदारी और क्रेडिट कार्ड ऑफर का झांसा देकर तीन लोगों से 3.23 लाख रुपए ठग लिए। बागसेवनिया इलाके में एक महिला को ऑनलाइन लहंगा बेचने के नाम पर एक लाख रुपए का चूना लगाया गया, जबकि क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट करने के बहाने एक युवती से 98 हजार रुपए की धोखाधड़ी हुई। इसी तरह मिसरोद में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को रिवॉर्ड पॉइंट्स के लालच में फंसाकर सवा लाख रुपए निकाल लिए गए। मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एम्स अस्पताल के पीछे रहने वाली 55 वर्षीय महिला ने यूट्यूब पर एक सस्ते लहंगे का देखा। में दिए गए नंबर पर संपर्क करने पर लहंगे की कीमत 1645 रुपए और अतिरिक्त चार्ज 100 रुपए बताई गई। महिला ने बारकोड के जरिए भुगतान किया, लेकिन जालसाज ने रकम न मिलने का बहाना बनाकर बार-बार पैसे भेजने को कहा। इस तरह महिला के खाते से कुल एक लाख रुपए कट गए। ठगी का अहसास होने पर महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसी इलाके की एक अन्य युवती को भी ठगी का शिकार बनाया गया। जालसाजों ने क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट करने के बहाने उससे 98 हजार रुपए ठग लिए। बागसेवनिया पुलिस ने दोनों मामलों में केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। इन घटनाओं ने ऑनलाइन शॉपिंग के खतरों को उजागर किया है, जहाँ आकर्षक ऑफर्स के पीछे छिपे जालसाज लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। दूसरी ओर, मिसरोद के स्नेहा नगर निवासी 25 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को एक्सिस बैंक के रिवॉर्ड पॉइंट्स रिडीम कराने का लालच दिया गया। जब पीड़ित ने हामी भर दी, तो जालसाजों ने एक फर्जी लिंक भेजकर उससे ओटीपी डलवा लिया। इसके बाद, उसके क्रेडिट कार्ड से सवा लाख रुपए निकाल लिए गए। मिसरोद पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे बैंक के नाम पर भी लोगों को ठगा जा सकता है। साइबर ठगों का एक नया तरीका गेमिंग ऐप्स के माध्यम से सामने आया है। इसमें बच्चों को गेम खेलने के दौरान 500 रुपए या उससे अधिक का इनाम जीतने का अवसर दिया जाता है। शुरुआत में जीती हुई छोटी रकम को तुरंत खिलाड़ी के बैंक खाते में ट्रांसफर करके ऐप की विश्वसनीयता बनाई जाती है। एक बार भरोसा जम जाने पर, खिलाड़ी को वीआईपी लेवल या मेगा टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया जाता है, जहाँ लाखों रुपए जीतने का दावा किया जाता है। इस झांसे में आकर बच्चे हजारों, लाखों रुपए दांव पर लगा देते हैं। जालसाज स्क्रीन पर लाखों रुपए की जीत का हिसाब भी दिखाते हैं, लेकिन असल में यह रकम कभी भी निकाली नहीं जा सकती। बाद में, ठग फोन हैक करके या अन्य तरीकों से खाते से सारे पैसे उड़ा लेते हैं। यह तरीका विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को निशाना बनाता है, जो गेमिंग के प्रति आकर्षित होते हैं। ठगों का नेटवर्क इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है। जब लोग फंस जाते हैं, तो उन्हें फिशिंग लिंक भेजे जाते हैं।

