नगर निगम उज्जैन ने दीयों को कचरा बनने से बचाया
भोपाल: सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम में नगर निगम उज्जैन ने उपयोग किए गए दीयों का रचनात्मक पुन: उपयोग कर एक अनूठी पहल की है। दीयों को कचरा बनने से बचाते हुए उनसे नंदी की एक भव्य और आकर्षक आकृति तैयार की गई है। यह पहल न केवल नगर निगम की रचनात्मकता को उजागर करती है, बल्कि 3र (कम करें, पुन: उपयोग करें, पुनर्चक्रण करें) की अवधारणा का एक सशक्त संदेश भी देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हेलीपैड परिसर में स्थापित नंदी की इस विशाल आकृति का अवलोकन किया और नगर निगम की इस रचनात्मक पहल की सराहना की। उन्होंने इसे प्रेरणादायक कदम बताया। यह कार्यक्रम 'सेवा संकल्प अभियान' का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य विभिन्न आयोजनों में इस्तेमाल की गई वस्तुओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना था। 'आशीर्वाद का दीया' इसी अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, दीपोत्सव कार्यक्रम से लगभग 05 लाख से अधिक दीयों का उपयोग करके यह विशाल नंदी की आकृति बनाई गई, जो इस पहल के पैमाने और प्रभाव को दर्शाती है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर संभाग आयुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा और नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम के महत्व को और बढ़ाया। नगर निगम उज्जैन का यह प्रयास कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पुरानी वस्तुओं को सीधे फेंकने के बजाय, उन्हें नया जीवन देकर रचनात्मक कार्यों में उपयोग करना एक सराहनीय दृष्टिकोण है। दीयों से बनी नंदी की आकृति न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में नंदी के महत्व को भी रेखांकित करती है। मुख्यमंत्री की इस सराहना से निश्चित रूप से इस प्रकार की पहलों को और प्रोत्साहन मिलेगा। यह उम्मीद की जाती है कि अन्य नगर निगम और निकाय भी इस रचनात्मक मॉडल का अनुसरण करेंगे।
उपयोग किए गए दीयों से बनी नंदी की भव्य आकृति न केवल नगर निगम की रचनात्मक क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में बदला जा सकता है। यह आयोजन 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम के तहत किया गया, जो सेवा संकल्प अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था और इसने सेवा की एक नई कहानी लिखी।



