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इन शिविरों का आयोजन उन मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करने के लिए किया जा रहा है जो अनुपस्थित पाए गए थे, या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए थे, अथवा मृत घोषित किए जाने के बाद भी सूची में बने हुए थे। यह कवायद करीब 11 महीने पहले एसआईआर के बाद शुरू हुई थी, जब भोपाल की मतदाता सूची में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाताओं में से एसआईआर के बाद यह संख्या घटकर 16.87 लाख रह गई थी। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इन शिविरों के दौरान, उन मतदाताओं के नामों की जांच की जा रही है जो एसआईआर प्रक्रिया में सूची से बाहर कर दिए गए थे। इनमें अनुपस्थित पाए गए 1 लाख 1503 मतदाता और स्थायी रूप से स्थानांतरित हुए 2 लाख 86 हजार 661 मतदाता भी शामिल हैं। बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) मैदान में उतरकर इन नामों की पड़ताल कर रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम गलती से या किसी अन्य कारण से हटा दिए गए थे, उन्हें पुनः सूची में जोड़ा जाए। युवा मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए, अब 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए एडवांस में फॉर्म-6 भरवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले इस प्रक्रिया के लिए डिक्लेरेशन की अनिवार्यता थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। इससे युवाओं को मतदाता बनने की प्रक्रिया में आसानी होगी और वे समय रहते अपने नाम सूची में जुड़वा सकेंगे। भोपाल की सभी 7 विधानसभा क्षेत्रों - बैरसिया, हुजूर, भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य, दक्षिण-पश्चिम, गोविंदपुरा और नरेला में ये विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुवार और शुक्रवार को भी लोग इन शिविरों में शामिल होकर अपने नाम जुड़वाने या सत्यापन करवाने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। 7 अक्टूबर को इन शिविरों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और उन्होंने अपने नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किए। एसएसडीआर सूचियों की कड़ाई से समीक्षा की जा रही है, जिसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहराए गए डेटा का पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा, नामांकन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए नाइट शेल्टर, मजदूर बस्तियों और बेघर लोगों के लिए भी विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं कि समाज के सभी वर्गों के पात्र नागरिक चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकें। जांच में यदि किसी व्यक्ति का नाम दो जगह पाया जाता है या किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची में बना रहता है, तो ऐसे नामों को ठीक किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सूची में केवल वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम ही शामिल हों, बीएलओ द्वारा तैयार की गई सूचियों को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) के साथ साझा किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सूची की शुद्धता सुनिश्चित होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची सटीक हो और कोई भी पात्र व्यक्ति मतदान से वंचित न रहे।
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मुख्य समाचार8 अक्टूबर 2026