अधिकरण ने चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट मांगी
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), भोपाल की केंद्रीय जोन बेंच ने भोपाल नगर निगम (बीएमसी) और अन्य अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और आदमपुर खंती में लंबित पुराने कचरे के निपटान में तेजी लाने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। यह आदेश 1 अक्टूबर को पारित किया गया और शनिवार को अपलोड किया गया। याचिका नितिन सक्सेना ने मध्य प्रदेश सरकार और अन्य के खिलाफ दायर की थी। एनजीटी ने अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का अनुपालन सुनिश्चित करने और चार सप्ताह के भीतर प्रगति/कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। बीएमसी ने स्वीकार किया है कि पुराने कचरे के निपटान में उसकी पिछली विफलताएं रही हैं। इससे पहले, नवंबर 2020 में आदमपुर कचरा निपटान का ठेका एक एजेंसी को दिया गया था, लेकिन 30 मई, 2024 की समय सीमा तक काम पूरा नहीं हुआ। इस एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अनुबंध रद्द कर दिया गया और जुर्माना लगाया गया। एक दूसरी वर्क आर्डर, 18 जून, 2025 को एम/एस सुसज्जा जेवी आनंद ऑटो को जारी किया गया था, उसे भी एजेंसी द्वारा काम शुरू न करने के कारण रद्द कर दिया गया। याचिकाकर्ता के वकील, हरप्रीत सिंह गुप्ता ने भोपाल में विभिन्न स्थानों, विशेषकर हरित क्षेत्रों में नगरपालिका ठोस कचरे की कथित अनधिकृत डंपिंग को उजागर किया। एनजीटी के आदेश में कालियासोत बांध के हरित क्षेत्र में कचरा डंपिंग और कचरा जलाने के आरोपों का उल्लेख है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ सकता है और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है।

