आदमपुर में 4 लाख टन से अधिक कचरा बाकी, सौराष्ट्र कंपनी को मिला 55 करोड़ का टेंडर
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भोपाल नगर निगम और संबंधित एजेंसियों को आदमपुर खंती में पड़े पुराने कचरे के निस्तारण की कार्रवाई रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है। शनिवार को हुई सुनवाई में अधिकरण ने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान तेज करने पर जोर दिया। याचिकाकर्ता ने चिंता जताई कि इससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। एनजीटी ने इस मामले में नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। भोपाल सहित प्रदेश के कई जिलों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी का मुद्दा भी उठाया गया, जिस पर अधिकरण ने चिंता व्यक्त की। नगर निगम भोपाल ने एनजीटी को सूचित किया कि भानपुर खंती में पुराने कचरे का बायो-रेमेडिएशन और वैज्ञानिक तरीके से क्लोजर पूरा हो चुका है। इस कार्य में 52.38 करोड़ रुपए खर्च हुए थे और 21.03 एकड़ जमीन का पुनरुद्धार किया गया। हालाँकि, आदमपुर में अभी भी 4 लाख मीट्रिक टन से अधिक पुराना कचरा (लिगेसी वेस्ट) पड़ा हुआ है। इसके निपटान के लिए नगर निगम ने मार्च 2026 में सौराष्ट्र कंपनी को 55 करोड़ रुपए का टेंडर दिया है, जो अब तक का सबसे महंगा टेंडर बताया जा रहा है। कंपनी को इस पूरे कचरे का निपटान 330 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रीवा, जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा के कचरे से बिजली और बायो-सीएनजी बनाने वाले संयंत्रों की क्षमता और कामकाज की रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी। इस रिपोर्ट में इन संयंत्रों के प्रदर्शन का विवरण दिया गया है। हालाँकि, उज्जैन से संबंधित रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। एनजीटी ने इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा है। सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सक्सेना द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की सेंट्रल जोन पीठ ने यह निर्देश जारी किए। याचिका में भोपाल के संरक्षित हरित क्षेत्रों और कलियासोत डैम के कैचमेंट में नियमों के विरुद्ध कचरा फेंकने और जलाने का आरोप लगाया गया है। यह मामला पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है, जिस पर अधिकरण ने गंभीरता दिखाई है। एनजीटी ने कचरे के ढेर के निपटान में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई जिलों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है। एनजीटी ने सभी संबंधित एजेंसियों से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करें और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। सुनवाई के दौरान, यह भी बताया गया कि एनजीटी द्वारा लगाया गया 1.80 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उस पर स्थगन आदेश जारी है। इस स्थगन के कारण मुआवजे की वसूली फिलहाल रुकी हुई है। यह मामला पर्यावरण क्षतिपूर्ति से जुड़ा है और इसके कानूनी पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। आदमपुर खंती में पड़े पुराने कचरे के विशाल ढेर के कारण आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस कचरे से निकलने वाली जहरीली गैसें और धूल कण वायुमंडल में मिलकर प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहे हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। एनजीटी ने नगर निगम भोपाल को निर्देश दिया कि वह कचरा प्रबंधन के लिए अपनाई जा रही विधियों की समीक्षा करे और सुनिश्चित करे कि वे पर्यावरण के अनुकूल हों। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाने पर भी जोर दिया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ संयंत्रों में कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता संतोषजनक पाई गई, जबकि अन्य में सुधार की गुंजाइश बताई गई। एनजीटी ने इस पर भी विस्तृत जानकारी मांगी है कि कैसे इन संयंत्रों की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है। यह मामला केवल कचरा निपटान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समग्र स्थिति पर भी सवाल उठाता है। एनजीटी ने इस पर चिंता व्यक्त की कि कई जिलों में नियमों का पालन न होने से पर्यावरण की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित की गई है। तब तक नगर निगम और संबंधित एजेंसियों को अपनी कार्ययोजना और की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, ताकि एनजीटी मामले की प्रगति का आकलन कर सके।

