मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी आयोग का पुनर्गठन किया गया, सेवानिवृत्त आईएएस मलय श्रीवास्तव अध्यक्ष बने
राज्य शासन ने राज्य कर्मचारी आयोग का पुनर्गठन कर दिया है। वित्त विभाग ने आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें कुल सात पद निर्धारित किए गए हैं। इस पुनर्गठन के तहत, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मलय श्रीवास्तव को अध्यक्ष और सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह को आयोग में न्यायिक सेवा का सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त कार्यालय अधीक्षक बादाम सिंह को भी सदस्य के पद पर शामिल किया गया है। यह आयोग मूल रूप से छह साल पहले तत्कालीन कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में गठित किया गया था, लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद इसे शिथिल कर दिया गया था। पुनर्गठित आयोग में कई अन्य अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा संचालनालय, मध्य प्रदेश के संचालक को अतिरिक्त प्रभार के साथ सदस्य बनाया गया है। साथ ही, सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग में पदस्थ सचिव स्तर के नामांकित अधिकारियों को भी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। वित्त विभाग के सेवानिवृत्त उपसचिव अजय चौबे को आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है। आयोग के कार्य और जिम्मेदारियां कर्मचारी आयोग के विचारणीय विषयों के संबंध में 12 दिसंबर 2019 को जारी राजपत्र में तय किए गए प्रावधानों के अनुसार यथावत रहेंगी। आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करते समय प्रदेश की आर्थिक स्थिति, प्रति व्यक्ति आय, लोक वित्त प्रबंधन, वित्तीय संसाधनों और आर्थिक विकास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखेगा। इसके अलावा, अन्य राज्यों में समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतनमान और पदनामों का भी अध्ययन किया जाएगा। आयोग को अपनी कार्यप्रणाली निर्धारित करने और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार होगा। राज्य सरकार भी आयोग को जरूरत के अनुसार आवश्यक जानकारी, महत्वपूर्ण दस्तावेज और सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सहयोग आयोग को प्रभावी ढंग से कार्य करने में मदद करेगा। आयोग राज्य शासन द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। यदि किसी विचारणीय विषय पर सिफारिशों को अंतिम रूप दिया जा चुका है, तो जरूरत पड़ने पर उन पर अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जा सकेगी। यह व्यवस्था आयोग को महत्वपूर्ण सिफारिशों को शीघ्रता से सरकार तक पहुंचाने में सक्षम बनाएगी। आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव की सेवा-शर्तें भविष्य में अलग से निर्धारित की जाएंगी।

