रातापानी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन में 90 ईंट भट्ठे बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। इन भट्ठों से वायु और जल प्रदूषण फैल रहा है, जिससे वन्यजीवों और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह भट्ठे नासीपुर, बमनई, करमई, जौंदरा, कुकाखो और बीरान सहित कई गांवों में सक्रिय हैं। ग्राम पंचायत बमनई के सरपंच ने 14 नवंबर 2025 को एनजीटी को पत्र लिखकर इन ईंट भट्ठों को बंद कराने की मांग की थी, क्योंकि ये क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण फैला रहे थे। इसके बावजूद, इन भट्ठों का संचालन जारी रहा। एनजीटी ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया और सुनवाई शुरू की। जांच के दौरान यह पाया गया कि भट्ठों के पास वन विभाग की कोई वैध अनुमति नहीं थी। साथ ही, जल एवं वायु प्रदूषण से संबंधित कानूनों के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक सहमति भी प्राप्त नहीं की गई थी। मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को निर्धारित है, जिसमें आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
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रातापानी इको-जोन में 90 अवैध ईंट भट्ठे, एनजीटी ने उठाए सवाल
5 अक्टूबर 2026 को 11:26 pm बजे

रातापानी इको-जोन में 90 अवैध ईंट भट्ठे, एनजीटी ने उठाए सवाल
