वन विभाग और बीएमसी से मांगा ब्योरा
भोपाल में पिछले पांच सालों में लगाए गए 80,000 पौधों की जीवित रहने की दर और खर्च किए गए फंड का ब्योरा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने तलब किया है। एनजीटी ने वन विभाग और भोपाल नगर निगम (बीएमसी) से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। एनजीटी ने यह आदेश 6 अक्टूबर को नितिन सक्सेना द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया। याचिका में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और अन्य को पक्षकार बनाया गया था। एनजीटी की पीठ ने राज्य सरकार, वन विभाग और बीएमसी के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया। न्यायाधिकरण ने विशेष रूप से वन विकास विंग और डीएफओ, पर्यावरण वानिकी प्रभाग से सवाल किया कि क्या जमा की गई धनराशि का उपयोग करके 2026 के मानसून के दौरान पौधरोपण का काम नहीं किया गया था। एनजीटी ने उन सभी पौधों का हिसाब मांगा जो पिछले पांच वर्षों में पानी या रखरखाव की कमी के कारण मुरझा गए थे। एनजीटी ने यह भी निर्देश दिया कि 70,000 पौधे जो हुज़ूर तहसील में लगाए गए थे और 10,000 पौधे जो सड़क डिवाइडर और सड़कों के किनारे लगाए गए थे, उनकी जियो-टैग और साइट-विशिष्ट तस्वीरों के साथ एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। एनजीटी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) और वन बल प्रमुख (एचओएफएफ) को एनएचएआई और अन्य निजी व सरकारी विकास एजेंसियों से पिछले पांच वर्षों में प्राप्त धन पर जिला-वार रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। वन विभाग को चार सप्ताह के भीतर एक अंतिम विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है, जिसमें पेड़ काटने के बजाय जमा किए गए धन के सत्यापन और एसडीओ द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब शामिल हों। न्यायाधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि पौधरोपण कार्य 2025 के मानसून के दौरान किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीएमसी को अगली सुनवाई से पहले अनिवार्य रूप से अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

