धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिनों का दीपोत्सव, पुष्य नक्षत्र में खरीदारी का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष दीपोत्सव 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ शुरू होगा और 11 नवंबर बुधवार को भाई दूज पर समाप्त होगा, जिसमें पुष्य नक्षत्र में खरीदारी का विशेष महत्व है
इस वर्ष दीपोत्सव 6 नवंबर शुक्रवार से 11 नवंबर बुधवार तक मनाया जाएगा। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार, कार्तिक मास में 1 ब 2 नवंबर को पुष्य नक्षत्र रहेगा, जिसकी अवधि में बर्तन, वस्त्र, आभूषण और वाहन खरीदना श्रेष्ठ माना गया है। इस कारण इस अवधि में अधिकतम वस्तुएं खरीदी जाती हैं। शुक्रवार 6 नवंबर को हस्त नक्षत्र में धनतेरस के साथ दीपोत्सव पर्व का शुभारंभ होगा। इस दिन प्रदोष व्रत और भगवान धन्वंतरि की जयंती मनाई जाएगी, जिससे पूरे वर्ष सुख, सौभाग्य और आरोग्यता बनी रहे। धनतेरस के दिन नवीन वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। शनिवार 7 नवंबर को चित्रा नक्षत्र में नरक चतुर्दशी रहेगी, जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार, 8 नवंबर रविवार को स्वाती नक्षत्र में दीपावली मनाई जाएगी। 8 नवंबर रविवार को सुबह 10:23 बजे से 9 नवंबर सोमवार को सुबह 11:01 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी। शास्त्र मान्यता अनुसार, प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना श्रेष्ठतम माना गया है। इसलिए रविवार शाम को भगवान शिव शक्ति, नंदन प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश, माता सरस्वती, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर जैसे देवताओं की पूजा-अर्चना की जाएगी। दीपावली के दिन भूमि, भवन, दुकान और नई योजनाओं का शुभारंभ करना श्रेष्ठतम माना जाता है। इस दिन यंत्र की विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है। सोमवार 9 नवंबर को स्नान-दान के साथ सोमवती अमावस्या रहेगी। अमावस्या को मुख्यतः पितरों की पूजा होती है। 9 नवंबर सोमवार को प्रतिपदा (एकम) तिथि सुबह 11:02 बजे से प्रारंभ होकर 10 नवंबर मंगलवार को दोपहर 12:09 बजे तक रहेगी। उक्त समयावधि के उदिया तिथि में गौमाता पूजन, गोवर्धन पूजा के साथ ही अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। हिंदू धर्म की मान्यता अनुसार, इस दिन गौमाता के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
