विदिशा में रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सीबीआई अधिकारी बनकर ठगों ने डराया, 8 बार ट्रांजेक्शन कर 69.27 लाख रुपये ठग लिए, 23 दिन तक बंधक बनाया
विदिशा: रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सीबीआई अफसर बनकर ठगा, 23 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट
विदिशा में बिजली कंपनी के एक रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर 69.27 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया। सात महीने तक पीड़ित को पत्नी समेत 23 दिन तक बंधक बनाए रखा गया। इतना डराया गया कि रिटायर्ड अधिकारी ने स्टेट बैंक के खाते से 8 बार ट्रांजेक्शन कर ठगों के खाते में पूरी रकम भेज दी। सात महीने तक खौफ में जी रहे पीड़ित ने पुलिस से शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटाई। बैंक ने लगातार मोटी रकम के ट्रांजेक्शन देखे तो खाते में होल्ड लगा दिया। इसके बाद पीड़ित सिविल लाइंस थाने पहुंचा और खाता खुलवाने की गुहार लगाई, तब जाकर ठगी का पूरा मामला सामने आया। थाना पुलिस ने एसपी रोहित काशवानी को इस गंभीर मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस महकमा सक्रिय हो गया। पुलिस टीम ने तत्काल ठगों के उन खातों से लेनदेन पर पाबंदी लगवा दी, जिनसे वे रकम नहीं निकाल पा रहे थे। पुलिस की इस सक्रियता से पीड़ित के 23 लाख रुपये फंसने से बच गए। एसपी रोहित काशवानी के अनुसार, न्यायालय के माध्यम से जल्द ही पीड़ित को यह रकम वापस मिल जाएगी। बाकी की रकम और पूरे मामले की जांच के लिए एसपी ने 5 टीमें गठित की हैं। सभी टीमों ने अलग-अलग पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है। साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया। पुलिस के अनुसार, पार्वतीपुरम बंटीनगर थाना क्षेत्र के शिव मंदिर वाली गली में रहने वाले रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को 5 अक्टूबर को एक फोन आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके नाम से सिम जारी की गई है और उस सिम से मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। कॉलर ने रिटायर्ड अधिकारी को इस अपराध में शामिल बताते हुए गिरफ्तारी की धमकी दी। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि अगर वे गिरफ्तारी से बचना चाहते हैं तो उन्हें पैसे देने होंगे। इस फोन कॉल से रिटायर्ड अधिकारी बुरी तरह डर गए। ठगों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे मांगे, जिसके बाद पीड़ित ने उनके बताए खाते में रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी ठगों का लालच बढ़ता गया और उन्होंने पीड़ित को 28 अक्टूबर तक फोन पर बंधक बनाए रखा। इस दौरान वे लगातार पैसों के लिए दबाव बनाते रहे। बताते हैं कि 8 बार ट्रांजेक्शन कर पीड़ित ने ठगों के खाते में 69.27 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों के दबाव में आए पीड़ित ने अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी उनके खाते में डाल दी। रिटायरमेंट के बाद मिले पेंशन फंड, बीमा और पत्नी के खाते में जमा राशि भी ठगों की ओर से बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इस ठगी के बाद पीड़ित की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें अपना घर बेचने की नौबत आ गई। वे गहरे आर्थिक संकट में फंस गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी राजपाल सिंह जादौन ने बताया कि मोबाइल और सोशल मीडिया नंबरों की जांच की जा रही है। पीड़ित की मनोदशा अभी भी ठीक नहीं है, वे गहरे सदमे में हैं और डरे हुए हैं। उन्होंने बताया कि बैंक ने पीड़ित के खाते में लगातार मोटी रकम भेजे जाने के बाद ठगी की आशंका पर 28 अक्टूबर को खाता होल्ड कर दिया था। बैंक की ओर से खाता होल्ड किए जाने के बाद ठगों ने पीड़ित को एक नया पैंतरा सुझाया। उन्होंने पीड़ित को सलाह दी कि वह पुलिस थाने जाकर अपने बेटे को पैसे भेजने के नाम पर आवेदन देकर खाता दोबारा चालू कराएं। इस पर पीड़ित सिविल लाइंस थाने पहुंचे और पुलिस से मदद मांगी। पुलिस की पूछताछ के दौरान ही ठगी का पूरा मामला खुलकर सामने आया। यह मामला तब और भी चर्चा में आया जब सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर चिंता जताई। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि इतनी जागरूकता के बावजूद पढ़े-लिखे लोग मोबाइल पर गिरफ्तार कैसे हो रहे हैं। उन्होंने कहा था, 'मोबाइल दीवार पर मार दो, डिजिटल अरेस्ट खत्म हो जाएगा। ' सीजेआई ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में बैंकों को भी जिम्मेदार बनाना होगा। एसपी रोहित काशवानी ने लोगों से अपील की है कि सीबीआई, ईडी या पुलिस कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही पैसों की मांग करती है। उन्होंने कहा, 'बिल्कुल न डरें। किसी को कोई जानकारी न दें और न ही डरें। ऐसा कोई कॉल आए तो तुरंत पुलिस से शिकायत करें। ' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ भी नहीं होता। उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी के साथ ठगी हो तो वह तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराए। उन्होंने बताया कि ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया था और पैसों की मांग की थी। इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहना बहुत जरूरी है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि ठगों ने पीड़ित के खाते की पूरी जानकारी पहले ही हासिल कर ली थी। जब खाते से लगातार मोटी रकम भेजी जाने लगी तो बैंक ने सतर्कता बरतते हुए खाते को होल्ड कर दिया। यह बैंक की सक्रियता ही थी जिसने आगे की ठगी को रोका। पीड़ित ने बताया कि ठगों ने उन्हें 23 दिन तक लगातार फोन पर डराया-धमकाया। इस दौरान उन्होंने 8 बार ट्रांजेक्शन किए और करीब 69.27 लाख रुपये ठगों के खाते में भेज दिए।

