हाईकोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया
दुष्कर्म के दोषी आसाराम एक बार फिर चर्चा में हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 3 अगस्त के इस आदेश का पालन नहीं करने पर नाराजगी भी जताई। आसाराम पर नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सन 2013 में दर्ज किया गया था। इसके बाद मामले की मुख्य जांच अधिकारी चंचल मिश्रा ने उन्हें मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित आश्रम से गिरफ्तार किया था। आसाराम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हर तिकड़म आजमाई, लेकिन राजस्थान पुलिस सेवा की जांबाज महिला अधिकारी टस से मस नहीं हुईं। आसाराम को पहले ही चंचल मिश्रा के इंदौर आने की भनक लग चुकी थी। वह आश्रम में प्रवचन करते रहे। आसाराम ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया, तब जांच अधिकारी चंचल मिश्रा ने उन्हें सीधे दरवाजा तोड़कर अंदर आने की चेतावनी दे दी। आश्रम के बाहर समर्थकों की भीड़ हंगामा मचा रही थी। आसाराम के पैंतरों के कारण पुलिस को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। उन्हें रात करीब डेढ़ बजे गिरफ्तार किया जा सका। गिरफ्तारी से बचने के लिए आसाराम ने अपने प्रभाव और रसूख का पूरा इस्तेमाल किया। तमाम दबावों को दरकिनार करते हुए चंचल मिश्रा ने उन्हें पकड़ा और साढ़े 6 सौ किलोमीटर दूर जोधपुर ले गईं। पीड़िता को न्याय दिलाने में चंचल मिश्रा की भूमिका सबसे अहम रही। उन्होंने इस केस में अपने हर कानूनी अधिकार का पूरी मजबूती से इस्तेमाल किया। चंचल मिश्रा और उनकी चार जवानों की टीम 31 अगस्त 2013 को आसाराम को गिरफ्तार करने इंदौर आईं। तमाम दबावों को दरकिनार करते हुए वे आसाराम को पकड़कर साढ़े 6 सौ किलोमीटर दूर जोधपुर ले गईं थीं।

