कानूनी आधार न बताने पर कोर्ट ने लगाई कॉस्ट
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने महू एसडीएम राकेश परमार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस संदीप एन। भट्ट की पीठ ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए एसडीएम पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने यह राशि सात दिनों के भीतर मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी और अपने ही आदेश में लगाई गई रोक का कानूनी आधार स्पष्ट न कर पाने के कारण की गई है। न्यायालय ने अपनी तीखी टिप्पणी में कहा कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि दूसरों को भी सबक मिले। यह अवमानना याचिका लीलाबाई, विद्या, राधा, महेश और अन्य लोगों द्वारा महू तहसील के बारडिया स्थित एक हेक्टेयर जमीन से जुड़े मामले को लेकर दायर की गई थी। उक्त जमीन सर्वे नंबर 3/4 पर दर्ज है। मामले के अनुसार, तहसीलदार ने 23 अप्रैल को जमीन से कब्जा हटाने और उसे डाट कंस्ट्रक्शन के संदीप सिंह सरजू को सौंपने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने एसडीएम न्यायालय में अपील कर राहत मांगी थी। एसडीएम परमार ने 28 मई तक तहसीलदार के आदेश पर रोक लगा दी थी। हालांकि, 9 जून को यह रोक हटा दी गई, जिसे लेकर याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि रोक हटाने के लिए किसी भी पक्ष ने कोई आवेदन नहीं दिया था। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने 24 जून को विवादित आदेश पर रोक लगा दी और एसडीएम से शपथ पत्र पर 25 सितंबर तक जवाब मांगा था। एसडीएम से यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि किस कानूनी प्रावधान के तहत स्थगन आदेश को हटाया गया। इसके बाद एसडीएम ने जवाब पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। जब 9 अक्टूबर को भी उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया और न ही वे सुनवाई में उपस्थित हुए, तो कोर्ट ने उन्हें 16 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और शपथ पत्र देने के निर्देश दिए। कोर्ट में पेश होने पर एसडीएम ने कहा कि रोक 28 मई तक ही प्रभावी थी और 9 जून को उसकी अवधि समाप्त हो गई थी। हालांकि, वे रोक हटाने का आधार नहीं बता पाए। इस मामले में कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए एसडीएम पर जुर्माना लगाया है। यह घटना न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही को रेखांकित करती है। हाईकोर्ट के आदेशों का पालन न करने और मनमानी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई भविष्य के लिए एक संदेश का काम करेगी। मामले की अगली सुनवाई और राशि जमा करने की समय सीमा पर नजर रहेगी।

