सीहोर के मंडी मुक्तिधाम का नजारा अब वीरान और उदास नहीं रहा। एक दशक पहले तक सूनी पड़ी यह जगह अब राजेंद्र राठौर के अथक प्रयासों से एक महकते उपवन में तब्दील हो गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट से रिटायर्ड राजेंद्र राठौर ने अपने पुरखों की स्मृति को जीवंत रखने के लिए यहां 5 हजार से ज्यादा पौधे लगाए हैं। यह किसी सरकारी योजना या बड़े प्रोजेक्ट का नतीजा नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के प्रकृति प्रेम और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान का जीता- जागता प्रमाण है। राठौर परिवार ने मुक्तिधाम के कायाकल्प के लिए 1 लाख रुपये भी दान किए, जिससे यहां सुविधाओं का विकास भी हुआ है। राजेंद्र राठौर पिछले 17 सालों से हर दिन मुक्तिधाम आते हैं। वे यहां औसतन 3 से 4 घंटे बिताते हैं। उनका यह समय सिर्फ सैर-सपाटे या आराम के लिए नहीं होता, बल्कि वे पूरी निष्ठा से पेड़-पौधों की देखभाल करते हैं। उन्हें पानी देना, खाद डालना और उनकी कटाई-छंटाई करना उनके दैनिक दिनचर्या का अहम हिस्सा है। इस सेवा भाव के पीछे उनकी प्रेरणा उनके माता-पिता हैं, जिन्हें प्रकृति से गहरा लगाव था। उन्हीं की याद में राजेंद्र ने इस मुक्तिधाम को एक हरा-भरा स्वर्ग बनाने का बीड़ा उठाया है। मुक्तिधाम की 10 एकड़ भूमि पर अब विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे लहलहा रहे हैं। इनमें आम, जामुन, पपीता, चीकू, नासपाती, सीताफल और बेल जैसे फलदार वृक्ष शामिल हैं, जो न केवल छाया देते हैं बल्कि आसपास के वातावरण को भी बेहतर बनाते हैं। इसके साथ ही, चंपा, रातरानी, चमेली, मधुकामनी और गुलमोहर जैसे खुशबूदार फूलों के पौधे भी लगाए गए हैं, जिनकी महक पूरे मुक्तिधाम परिसर में फैली रहती है। इन 20 प्रजातियों के पेड़ों ने इस स्थान को एक नई पहचान दी है। यह सब कुछ केवल राजेंद्र राठौर के अकेले के प्रयासों से संभव नहीं हुआ। नगरपालिका और कई सामाजिक संस्थाओं ने भी इस नेक काम में अपना सहयोग दिया है। उनके सहयोग से मुक्तिधाम में कई आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं। इन सुविधाओं में आगंतुकों के बैठने के लिए कुर्सियां, दो छोटे मंदिर, लकड़ी का गोदाम, मुंडन कराने के लिए एक विशेष कक्ष, पानी की टंकियां और एक वाटर कूलर शामिल हैं। यह सामूहिक प्रयास दर्शाता है कि जब लोग एक अच्छे उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं, तो बड़े बदलाव संभव होते हैं। राठौर परिवार का योगदान केवल पौधारोपण तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने मुक्तिधाम परिसर में एक विशेष आकर्षण के तौर पर आधा एकड़ भूमि पर एक सुंदर गुलाब का बगीचा भी विकसित किया है। यहां विभिन्न रंगों और किस्मों के गुलाब के फूल खिले रहते हैं, जो इस स्थान की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। यह बगीचा न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि यह शांति और सुकून का अनुभव भी कराता है। एक समय था जब सीहोर का यह मंडी मुक्तिधाम एक वीरान और उपेक्षित स्थान हुआ करता था। लोग यहां आने से कतराते थे, और यह स्थान केवल अंतिम संस्कार के लिए ही याद किया जाता था। यह परिवर्तन प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का एक अनूठा उदाहरण है।
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रिटायर्ड कर्मचारी ने सीहोर के मुक्तिधाम को उपवन में बदला, 5 हजार पौधों से सजाया
5 अक्टूबर 2026 को 12:05 am बजे

रिटायर्ड कर्मचारी ने सीहोर के मुक्तिधाम को उपवन में बदला, 5 हजार पौधों से सजाया
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