जून की कमी ने बिगाड़ा सीजन का हिसाब
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो चुकी है। इस सीजन में प्रदेश को सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश मिली है। मानसून 24 जून को प्रदेश में दाखिल हुआ था और 3 अक्टूबर तक सक्रिय रहा। इस दौरान कुल 908.4 मिमी यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच है। मानसून के दौरान प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई, जबकि बाकी जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ। जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश ने पूरे सीजन के हिसाब को बिगाड़ दिया था। बारिश का सबसे बड़ा अंतर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच देखा गया। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में स्थिति ज्यादा कमजोर रही, जहां 12 प्रतिशत कम पानी बरसा। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में भी सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम पानी गिरा। इसी तरह, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम्, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक बारिश कम हुई। मानसून की विदाई के साथ ही मौसम का मिजाज भी बदलने लगा है। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, अब दिन में गर्मी और रात में ठंडक का असर बढ़ेगा। अगले तीन दिनों तक धूप और गर्मी बढ़ने की संभावना है, जबकि रात में ठंडक बढ़ने लगेगी। ज्यादातर शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से नीचे रहने की उम्मीद है। अक्टूबर में अगस्त-सितंबर जैसी लगातार बारिश नहीं होगी, लेकिन कुछ इलाकों में हल्की या रिमझिम बारिश होती रह सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, 4, 5 और 6 अक्टूबर को प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि, 7 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडोरी और अनूपपुर जैसे जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा 8 और 9 अक्टूबर को भी कुछ स्थानों पर बारिश के आसार बने हुए हैं। इस सीजन में मानसून की गतिविधियां जून में छह दिन, जुलाई में 31 अगस्त में 31 सितंबर में 30 और अक्टूबर में दो दिन दर्ज की गईं। जून में मानसून पूरे प्रदेश में महज नौ दिन में पहुंच गया था, लेकिन जून की कमी ने पूरे सीजन का हिसाब बिगाड़ दिया। जुलाई में शुरुआती तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया। सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश ने फिर जोर पकड़ा, फिर भी जून की कमी पूरी नहीं हो सकी।

