मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में पश्चिमी बायपास निर्माण के कारण आसपास के गांवों में जलसंकट की स्थिति पैदा हो सकती है। भोपाल शहर में 11 मील के बाद रतनपुर सड़क से फंदा बायपास तक 36.611 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए रोजाना 4500 किलोलीटर पानी की जरूरत बताई जा रही है। दो वर्षों में इस प्रोजेक्ट पर कुल 328 करोड़ लीटर पानी खर्च होने का अनुमान है, जिसकी पूर्ति भूजल से ही होगी। यदि रोजाना 45 लाख लीटर पानी जमीन से निकाला गया, तो आसपास के कुएं, बोरिंग सूखने के साथ ही फसलों पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 2981.65 करोड़ रुपए है। सड़क के बेस और सब-ग्रेड निर्माण के लिए 3000 किलोलीटर पानी की खपत होगी। धूल नियंत्रण के लिए 1000 केएल पानी छिड़काव में खर्च किया जाएगा, जबकि श्रमिकों और कर्मचारियों की दैनिक जरूरतों के लिए 500 केएल पानी लगेगा। इस तरह, निर्माण कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जो भूजल स्तर पर भारी दबाव डालेगी। यह प्रस्तावित बायपास मार्ग भोपाल जिले के फंदा क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसके दायरे में कुल 29 गांव और कस्बे आते हैं। मुख्य प्रभावित गांवों में रतनपुर, पिपलिया केशो, सेमरी कलां, थुआ खेड़ा, आमला, झगरिया खुर्द, मूंदला, नरेला, खोकरिया, डूबडी और फंदा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पानी की कमी का संकट गहरा सकता है। भोपाल जिले में पिछले दो दशकों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2000 से 2020 के बीच, प्री-मानसून भूजल स्तर 12.95 मीटर से गिरकर 12 मीटर नीचे चला गया। इसी तरह, पोस्ट-मानसून स्तर 8.5 मीटर से गिरकर 4.3 मीटर नीचे पहुंच गया है। यह गिरावट चिंताजनक है और भविष्य में पानी की उपलब्धता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां स्थानीय आबादी अपनी खेती और घरेलू उपयोग के लिए पूरी तरह से भूजल पर निर्भर है, वहां निर्माण कार्यों के लिए पानी के बड़े पैमाने पर उपयोग से जल स्तर और भी नीचे जा सकता है। इससे न केवल पीने के पानी की समस्या बढ़ेगी, बल्कि सिंचाई के लिए भी पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। खुद प्रोजेक्ट का निर्माण करने वाली एजेंसी भी इस बात को स्वीकार करती है कि प्रोजेक्ट में पानी की भारी जरूरत के लिए भूजल के अत्यधिक दोहन से जलस्तर गिरने की आशंका है। रिपोर्ट में वर्षा जल संचयन संरचनाओं को बनाने का दावा किया गया है, लेकिन यह देखना बाकी है कि यह कितना प्रभावी होगा। दिन-रात हैवी ड्यूटी पंपों से पानी खींचने के कारण भूजल स्तर नीचे जाने से पिपलिया केशो, सेमरी कलां, थुआ खेड़ा, फंदा जैसे गांवों के घरेलू कुएं, हैंडपंप और किसानों के बोरवेल सूखने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
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भोपाल बायपास में लगेगा 328 करोड़ लीटर पानी
30 अक्टूबर 2026 को 11:24 pm बजे

भोपाल बायपास में लगेगा 328 करोड़ लीटर पानी
