सीहोर जिले में कोटवारों ने फटी वर्दी पहनकर काम करने से साफ इनकार कर दिया है। उनकी इस हड़ताल का सीधा असर राजस्व संबंधी कामों पर पड़ा है, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोटवार अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में सेवाभूमि का मालिक बनाना, उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित करना और वर्दी के लिए दी जाने वाली राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजना शामिल है। इस आंदोलन में सभी गांवों के ग्राम चौकीदार भी शामिल हो गए हैं, जिससे समस्या और बढ़ गई है। कोटवारों की इस हड़ताल के कारण किसानों के सीमांकन, बंटवारा और कब्जा दिलाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। तहसीलदार, आरआई और पटवारी जैसे राजस्व अधिकारी भी जमीनी स्तर पर कोई भी काम नहीं कर पा रहे हैं, जिसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ द्वारा बुलाई गई इस हड़ताल के समर्थन में पूरे प्रदेश के कोटवार लामबंद हो गए हैं। सीहोर के कोटवार भी 31 अक्टूबर तक अपनी हड़ताल जारी रखेंगे। इस बीच, 28 अक्टूबर को कलेक्टर को मांगों के संबंध में एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ के जिला अध्यक्ष छगनलाल मालवीय ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोटवारों को खाकी वर्दी प्रदान की थी, लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उनकी जायज मांगों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मालवीय ने बताया कि कोटवारों की वर्दी पूरी तरह से फट चुकी है और राजस्व विभाग द्वारा दी जाने वाली सिली हुई वर्दी पहनने लायक नहीं बची है। इस प्रदर्शन में संगठन के कई कोटवार साथी मौजूद रहे और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। कोटवारों की हड़ताल का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था चरमराने लगी है। राजस्व विभाग के जमीनी स्तर के कर्मचारी, जो किसानों से सीधे जुड़े होते हैं, वह भी इस हड़ताल के कारण अपने कार्यों को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। किसानों को अपनी जमीन से जुड़े छोटे-मोटे कामों के लिए भी अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें कोई समाधान नहीं मिल रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से उन किसानों के लिए चिंताजनक है जिन्हें तत्काल किसी काम को पूरा करवाना है। सीमांकन और बंटवारा जैसे कार्य, जो अक्सर विवादों का कारण बनते हैं, अब अनिश्चित काल के लिए टल गए हैं। कोटवारों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। उनकी मांगें केवल वर्दी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपनी सेवा भूमि को मालिकाना हक के रूप में चाहते हैं और सरकारी कर्मचारी का दर्जा भी मांग रहे हैं। ये मांगें उनके लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का हिस्सा हैं। मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने इस हड़ताल का नेतृत्व करते हुए पूरे प्रदेश के कोटवारों से एकजुट होने का आह्वान किया है। संघ का कहना है कि यह केवल सीहोर जिले का मामला नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में कोटवारों की स्थिति एक जैसी है। उनकी वर्दी पुरानी और फटी हुई है, और उन्हें सरकारी कर्मचारी के तौर पर मिलने वाली सुविधाएं भी अपर्याप्त हैं। संघ के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती और कोई ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी। 31 अक्टूबर तक हड़ताल जारी रहने की घोषणा के साथ, यह तय है कि किसानों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। 28 अक्टूबर को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम भी इसी हड़ताल का हिस्सा है, जिसके माध्यम से वे अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। कोटवारों की मांगों में से एक महत्वपूर्ण मांग यह है कि उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। वर्तमान में, उनकी सेवा शर्तों और सुविधाओं को लेकर स्पष्टता की कमी है, जिससे उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यदि राशि सीधे उनके खाते में भेजी जाए, तो वे अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार बेहतर गुणवत्ता वाली वर्दी खरीद सकेंगे।
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सीहोर के कोटवार फटी वर्दी में काम से इंकार, 31 अक्टूबर तक हड़ताल
24 अक्टूबर 2026 को 11:00 pm बजे

सीहोर के कोटवार फटी वर्दी में काम से इंकार, 31 अक्टूबर तक हड़ताल
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