केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य घोषित किया है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश में निर्णायक लड़ाई शुरू करने का संकल्प दोहराया है। यह घोषणा भले ही चौंकाने वाली लगे, लेकिन नक्सलमुक्त प्रदेश जैसे कठिन लक्ष्य को हासिल करने में गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सफलता पर भरोसा करने की हिम्मत आती है। यह मिशन केवल छोटे विक्रेताओं को पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके पीछे के बड़े सप्लायरों, वित्तपोषकों, परिवहन नेटवर्क और सिंडिकेट तक पहुंचना होगा। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने आला अफसरों के साथ बैठक में पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने का निर्देश दिया है। मध्य प्रदेश की भौगोलिक स्थिति इसे नशे की तस्करी के प्रति संवेदनशील बनाती है, क्योंकि इसकी सीमाएं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों से लगती हैं। नशीले पदार्थों की तस्करी एक अंतरराज्यीय समस्या है, जहां माल एक राज्य में पहुंचता है, दूसरे में संग्रहीत होता है और तीसरे में वितरित किया जाता है। इसलिए, इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस की कार्रवाई को जिला-स्तर की सीमाओं से बाहर निकलकर अंतरराज्यीय ड्रग कॉरिडोर, संयुक्त खुफिया तंत्र और एंटी- नारकोटिक्स टास्क फोर्स पर जोर देना होगा। हाल की उच्चस्तरीय बैठकों में भी इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। नशामुक्त मध्य प्रदेश का अर्थ सिर्फ अधिक मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त करना या अधिक लोगों को गिरफ्तार करना नहीं है। वास्तविक सफलता तब हासिल होगी जब नशे की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट जाएगी, युवाओं में इसकी मांग घटेगी, नशे की गिरफ्त में आए लोगों का प्रभावी ढंग से उपचार और पुनर्वास होगा, और समाज में नशे के प्रति स्वीकार्यता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर 'नेटवर्क के विनाश' को सफलता का मुख्य पैमाना बनाना होगा। इस बड़े सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत एक स्पष्ट लक्ष्य, निश्चित समय-सीमा और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से होती है।
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गृह मंत्री का ऐलान: 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त होगा मध्य प्रदेश
5 अक्टूबर 2026 को 12:05 am बजे

गृह मंत्री का ऐलान: 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त होगा मध्य प्रदेश
