मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत 25 दिन बाद निःशुल्क रजिस्ट्री की शुरुआत, संपत्ति विवादों की जानकारी छिपाने पर अब संपत्ति धारक ही होगा जिम्मेदार
मध्य प्रदेश में गांवों में मकानों का मालिकाना हक देने वाली स्वामित्व योजना (स्वमित्व योजन) के तहत 25 दिन बाद निःशुल्क रजिस्ट्री (एमपी प्रोपेर्त्य रेगिस्त्र्य रुले) की शुरुआत हो गई है। सोमवार, 12 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में 5 हजार से अधिक रजिस्ट्री हुईं, जबकि राजधानी भोपाल खबर) में करीब 46 रजिस्ट्री संपन्न हुईं। यह बदलाव पटवारियों (पत्वरि) और तहसीलदारों (तेह्सिल्दर) के विरोध के बाद सरकार द्वारा नियमों में किए गए संशोधन का परिणाम है। नए नियमों के तहत, अब पटवारी के बजाय सीधे सरकार की ओर से नाम से अधिकृत रजिस्ट्री की जाएगी। एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि यदि रजिस्ट्री (रेगिस्त्र्य रुले) से जुड़ी कोई जानकारी गलत पाई जाती है या छिपाई जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी मकान (स्वमित्व योजन अपडेट) या जमीन के पुराने विवाद की जानकारी छिपाने वाले संपत्ति धारक की होगी, न कि पटवारी की। पहले पटवारी की भूमिका ऐसी थी कि रजिस्ट्री करने वाले को ही अधिकारी बताया जाता था। घर का पता दर्ज करते समय पटवारी के घर का पता दर्ज होता था, और पदनाम में हर पेज पर सिर्फ 'निष्पादक' लिखा होता था। जमीन का रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल के अनुसार होता था, और भवन निर्माण के लिए नक्शा मंजूर कराए बिना निर्माण न करने की शर्त होती थी। जानकारी छिपाने को लेकर जिम्मेदारी की एक अलग शर्त भी जुड़ी थी। नई व्यवस्था के तहत, सरकार अपनी पदीय हैसियत से रजिस्ट्री करेगी, व्यक्तिगत रूप से नहीं। अब तहसील और कार्यक्षेत्र का नाम दर्ज किया जाएगा, और पदनाम में 'योजनांतर्गत अधिकृत निष्पादक अधिकारी' लिखा होगा। रजिस्ट्री के दिन स्वामित्व अधिकार रिकॉर्ड आधार होगा। यह शर्त रजिस्ट्री दस्तावेज से हटा दी गई है। जानकारी छिपाने पर संपत्ति धारक ही जिम्मेदार होगा। हालांकि, यह सवाल उठता है कि नई रजिस्ट्री में तो जिम्मेदारी संपत्ति मालिक की होगी, लेकिन कई गांवों में जमीन की सीमाओं और मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवादों का क्या होगा?

