कलेक्टर ने जनसुनवाई में 224 आवेदनों पर सुनवाई की, 40 आधार अपडेशन और 152 लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण हुए
कलेक्टर कार्यालय के कक्ष क्रमांक 10 (व्यारमा) में आयोजित जनसुनवाई में जिले के दूरदराज क्षेत्रों से आए आवेदकों की समस्याओं को सुना गया, जहाँ 224 आवेदनों पर सुनवाई हुई और अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए गए
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कलेक्टर कार्यालय के कक्ष क्रमांक 10 (व्यारमा) में आयोजित जनसुनवाई में जिले के दूरदराज क्षेत्रों से आए आवेदकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान सामान्य जनसुनवाई में 224 आवेदनों पर सुनवाई की गई, जिन पर संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। जनसुनवाई के दौरान 40 आधार अपडेशन के मामलों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी नागरिकों के महत्वपूर्ण व्यक्तिगत डेटा को अद्यतन रखा जाए। इसके अतिरिक्त, 152 लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण किए गए, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन स्वास्थ्य जांचों का उद्देश्य बीमारियों का शीघ्र पता लगाना और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना है। जनसुनवाई में विभिन्न मुद्दों से संबंधित कुछ सामूहिक आवेदन भी प्रस्तुत किए गए। इन सामूहिक आवेदनों में स्थानीय समुदायों की साझा चिंताओं और आवश्यकताओं को उजागर किया गया। कलेक्टर ने इन सभी आवेदनों को स्वीकार किया और संबंधित विभागों को उचित कार्रवाई के लिए निर्देशित किया, ताकि सामूहिक समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर हो सके। इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत प्रवीण फुलपगारे ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अपर कलेक्टर राकेश मोहन त्रिपाठी, डिप्टी कलेक्टर ब्रजेश सिंह, डिप्टी कलेक्टर रचना प्रजापति, और डिप्टी रानी अहिरवार भी उपस्थित रहे। लोकसेवा प्रबंधक चक्रेश पटेल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने जनसुनवाई की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। बैठक में, अधिकारियों ने आवेदकों द्वारा उठाई गई विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक आवेदन को पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ संभाला जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनता की समस्याओं को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं और उनके समाधान के लिए सक्रिय रूप से काम करें। प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से, जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सुझावों और शिकायतों को गंभीरता से लिया गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि वे नियमित रूप से अपने कार्यों की प्रगति की रिपोर्ट करें और किसी भी लंबित मामले में अनावश्यक देरी न हो।

