निजी जमीनें ग्रीन बेल्ट में शामिल, टिंबर व्यापारियों की जमीनें आरक्षित, आवासीय क्षेत्रों में उद्योगों के लिए जगह, मास्टर प्लान पर विवाद बढ़ा
खंडवा विकास योजना 2041 (मास्टर प्लान) में किए गए प्रावधानों में भारी विसंगतियां सामने आ रही हैं, जो भविष्य में आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन सकती हैं। यदि वर्तमान प्रावधानों के साथ मास्टर प्लान लागू होता है, तो भविष्य में आम नागरिक 1500 वर्गफीट से कम वाले प्लॉट पर दो मंजिल से ज्यादा भवन निर्माण नहीं कर पाएंगे। मास्टर प्लान की इन विसंगतियों को लेकर चेंबर ऑफ कॉमर्स सहित आमजन ने करीब 150 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराई हैं। मास्टर प्लान के अनुसार, 600 वर्गफीट के प्लॉट पर, जिसमें 7 बाय 15 वर्गमीटर यानी करीब 1250 वर्गफीट का प्लॉट शामिल है, आगे तीन वर्ग मीटर का स्पेस रखना अनिवार्य होगा। इस पर प्लॉट मालिक को भूखंड के कुल क्षेत्रफल का 1.5 गुना निर्माण योग्य क्षेत्रफल (एफएआर) मिलेगा। इसका मतलब है कि आप प्लॉट के क्षेत्रफल का डेढ़ गुना ही निर्माण कर पाएंगे। इसके साथ ही, अधिकतम 6 मीटर यानी करीब 20 फीट की ऊंचाई तक केवल दो मंजिल मकान बनाने की ही अनुमति दी जाएगी। यह प्रावधान भविष्य में नए भवन निर्माण करने वालों के लिए एक बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। इसका कारण यह है कि शहर में अधिकतर कॉलोनियों में 600 वर्गफीट से लेकर 1500 वर्गफीट तक के ही प्लॉट काटे गए हैं। ऐसे में, छोटे भूखंडों पर निर्धारित ऊंचाई और मंजिलों की सीमा के कारण लोगों को अपनी जरूरत के हिसाब से निर्माण करना मुश्किल हो जाएगा। सड़कों की चौड़ाई को लेकर भी मास्टर प्लान में बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। हाईवे की चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है, जबकि शहर की सड़कें 24 मीटर चौड़ी करने का प्रस्ताव है। खंडवा-छैगांवमाखन स्टेट हाईवे पर एक नया रोड प्रस्तावित है, जिसकी कुल चौड़ाई 18 मीटर होगी, हालांकि इसके टेंडर अभी बाकी हैं। इसके विपरीत, शहर की कई सड़कें नए मास्टर प्लान में 18 से 24 मीटर तक चौड़ी कर दी गई हैं। उदाहरण के तौर पर, इंदौर नाका से जिला अस्पताल और जलेबी चौक से आबना नदी तक की सड़कों की चौड़ाई 24 मीटर से बढ़ाकर 36 मीटर कर दी गई है। इंदौर नाका से आगे रोड की चौड़ाई 45 मीटर दर्शाई गई है। यह चिंता का विषय है क्योंकि यहां पहले से पीएनजी गैस लाइन डल चुकी है, जिसे 24 मीटर चौड़ाई के आधार पर ही अनुमति मिली थी। यदि रोड की चौड़ाई बढ़ती है, तो पाइपलाइन भी रोड के बीच में आ जाएगी, जिससे भविष्य में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इस प्रकार, सड़कों के विस्तार की योजनाएं मौजूदा बुनियादी ढांचे के साथ टकराव पैदा कर सकती हैं। मास्टर प्लान 2041 में कई निजी जमीनों को भी ग्रीन बेल्ट में शामिल कर लिया गया है, जिसका जमकर विरोध हो रहा है। इसमें टिंबर व्यापारियों के लिए लाइसेंस वाली 10-10 हजार वर्गफीट की जगह को ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित किया गया है। इस प्रावधान से प्रभावित लोगों ने भी आपत्ति जताई है। यह कदम लकड़ी कारोबारियों के लिए बड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है, क्योंकि उनकी व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। ग्रीन बेल्ट के लिए जमीन आरक्षित करने का उद्देश्य शहर के पर्यावरण को बेहतर बनाना हो सकता है, लेकिन इससे प्रभावित व्यक्तियों और व्यवसायों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा। आवासीय क्षेत्रों में उद्योगों के लिए जगह का आवंटन भी मास्टर प्लान का एक विवादास्पद पहलू है। नए मास्टर प्लान में इंदौर रोड स्थित निमाड़ टेक्सटाइल के पास की 11 एकड़ जमीन को, जो पिछले दो मास्टर प्लान में बस स्टैंड के लिए आरक्षित थी, अचानक हटा दिया गया है और सामान्य कर दिया गया है। इसके अलावा, इंदौर रोड पर आवासीय कॉलोनियों के आसपास एक-एक एकड़ में उद्योगों के लिए भी जगह बताई गई है। इस प्रकार के बदलावों से आवासीय क्षेत्रों में शोर, प्रदूषण और यातायात की समस्या बढ़ सकती है, जो निवासियों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा। मास्टर प्लान में प्रस्तावित सड़क चौड़ाई विस्तार के तहत, जलेबी चौक से बस स्टैंड तक 18 मीटर, मच्छी बाजार से मानसिंगका तक 18 मीटर, घंटाघर से बजरंग चौक तक 12 मीटर, और बजरंग चौक से भगतसिंह चौक तक 18 मीटर चौड़ी सड़कें बनाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, टाउन हॉल से रेलवे स्टेशन तक 18 मीटर, गिदवानी मार्केट से जैन मंदिर तक 15 मीटर, तीन पुलिया से बड़ाबम चौक तक 18 मीटर, और शिवाजी चौक से शर्मा गैरेज तक 18 मीटर चौड़ी सड़कें प्रस्तावित हैं। नगर निगम से मानसिंगका मिल तक 24 मीटर, सराफा बाजार का मार्ग 12 मीटर, और बुधवारा बाजार मार्ग 12 मीटर चौड़ा होगा। अनाज मंडी से घासपुरा हिंदी स्कूल तक 15 मीटर, शिवाजी चौक से कुम्हार बेड़ा तक 12 मीटर, कुम्हारबेड़ा चौराहा से तीन पुलिया तक 15 मीटर, और शर्मा गैरेज से बड़ाबम चौक तक 18 मीटर चौड़ी सड़कें बनाई जाएंगी।

