इंडिया मोबाइल कांग्रेस ने बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने रखा है।
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एशिया के सबसे बड़े डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार मंच, इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आइएमसी), 2026 ने भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को एक नई दिशा दी। इस आयोजन का मूल मंत्र 'सीमाओं के बिना विस्तार' था, जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल माध्यमों से लोगों को जोड़ने और विश्व स्तर पर प्रौद्योगिकियां विकसित करने की दिशा में मिली सफलता को रेखांकित करना था। इस वर्ष के कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, 6जी, इंटेलिजेंट आरएएन, एआइ आधारित दूरसंचार, एज और क्लाउड कंप्यूटिंग, स्वायत्त नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, उपग्रह संचार, नेटवर्क एपीआइ और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई। आइएमसी, 2026 चार प्रमुख स्तंभों - सृष्टि, संवर्धन, सशक्तिकरण और सुरक्षा - पर आधारित था। इन स्तंभों का लक्ष्य नवाचार और अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना, निवेश, उद्यमिता और विनिर्माण को प्रोत्साहित करना, डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से अवसरों का विस्तार करना तथा सुरक्षित व विश्वसनीय नेटवर्क सुनिश्चित करना था। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस अवसर पर इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में भारत में डिजिटल संपर्क सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उन्होंने रेखांकित किया कि आगामी दशक में देश का ध्यान स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने और भारतीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने पर केंद्रित रहेगा। यह दृष्टिकोण देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और डीपफेक जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत डिजिटल सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। यह सुरक्षा ढांचा न केवल देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे की रक्षा करेगा, बल्कि भविष्य की प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए एक विश्वसनीय मंच भी प्रदान करेगा। इंडिया मोबाइल कांग्रेस, 2026 ने स्पष्ट किया कि भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाएं केवल भाषणों तक सीमित नहीं हैं। बीएसएनएल और रिलायंस जैसी प्रमुख कंपनियों के प्रयासों ने इस दिशा में ठोस आधार तैयार किया है। बीएसएनएल ने अपने स्वदेशी 4जी और 5जी तकनीकी ढांचे का प्रदर्शन किया, जो राष्ट्रीय नेटवर्क में संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह प्रदर्शन भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं का एक सशक्त प्रमाण था। इस अवसर पर भारत 6जी एलायंस के पास सात हजार से अधिक पेटेंट होने की जानकारी दी गई, जिनमें लगभग चार हजार अंतरराष्ट्रीय पेटेंट शामिल हैं। यह आंकड़ा भारत की अनुसंधान और विकास क्षमताओं में वृद्धि को दर्शाता है। रिलायंस जियो ने भी अपना 6जी-पूर्व तकनीकी ढांचा और गीगा एमआइएमओ रेडियो प्रदर्शित किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत छठी पीढ़ी की मोबाइल सेवाएं शुरू करने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। कंपनी ने कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा मंचों में एआइ के संभावित उपयोगों पर भी प्रकाश डाला, जो भविष्य में इन क्षेत्रों में क्रांति ला सकते हैं। ऐसे समय में जब भारत के अरबों उपभोक्ता देश के बाहर विकसित प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हैं, इंडिया मोबाइल कांग्रेस में भारतीय कंपनियों द्वारा मूल्य सृजन और सुरक्षा के लिहाज से पेश की गई महत्वाकांक्षाएं पूरी तरह व्यावहारिक दिखाई देती हैं।

