पोती के हमले के बाद दादा को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया
इंदौर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 20 साल की पोती ने अपने 75 साल के दादा की क्रिकेट बैट से सिर पर वार कर हत्या कर दी। यह वारदात शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे एरोड्रम थाना क्षेत्र के महालक्ष्मी नगर में हुई। पुलिस ने युवती को हिरासत में ले लिया है और पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में युवती ने बताया कि उसके दादा उस पर बुरी नजर रखते थे और कई बार उसके साथ अश्लील हरकतें कर चुके थे। बदनामी और डर के कारण वह यह बात परिजनों को नहीं बता पा रही थी। पुलिस की पूछताछ में युवती ने विस्तार से बताया कि उसके दादा, जो सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त थे और अपनी पत्नी के साथ रहते थे, लगातार उसे परेशान कर रहे थे। उन्होंने कई बार ऐसी हरकतें कीं जिससे युवती असहज महसूस करती थी। घटना वाली रात वह बुलेट से दादा-दादी के घर आई थी और वहीं रुकी थी। रात में किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद गुस्से में आकर युवती ने पास रखे क्रिकेट बैट से दादा के सिर पर हमला कर दिया। सिर पर गंभीर चोट लगने से दादा लहूलुहान हो गए। उनकी पत्नी ने उन्हें खून से लथपथ देखा तो शोर मचाया। परिजन उन्हें तुरंत अरविंदो अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। डीसीपी नरेंद्र रावत ने बताया कि पुलिस आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। युवती द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की पुष्टि के लिए मनोवैज्ञानिक तरीके से भी उससे पूछताछ की जा रही है। घटना के वास्तविक कारणों और हमले की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या युवती ने पहले कभी इस बारे में किसी को बताने की कोशिश की थी या क्या परिवार को इस बारे में कोई जानकारी थी। युवती के मुताबिक, वह अपने दादा की हरकतों से काफी परेशान थी। वह डरती थी कि अगर उसने यह बात किसी को बताई तो परिवार की बदनामी होगी। इसी डर और आशंका के चलते उसने यह राज अपने सीने में दबाए रखा। जब दादा की हरकतें हद से ज्यादा बढ़ गईं, तब उसने आखिरकार अपना आपा खो दिया और यह खौफनाक कदम उठा लिया। यह घटना समाज में महिलाओं और खासकर युवा लड़कियों के सामने आने वाली असुरक्षा और चुप्पी के दबाव पर भी सवाल खड़े करती है। कई बार डर और सामाजिक दबाव के चलते वे अपनी आपबीती बताने से कतराती हैं, जिसका परिणाम कभी-कभी बेहद भयानक हो सकता है। यह घटना एक बार फिर पारिवारिक सुरक्षा और बुजुर्गों के व्यवहार पर चिंता व्यक्त करती है।

