पवन खेड़ा ने कहा कि बुनियादी मुद्दे मुख्यधारा के विमर्श से गायब हैं
भोपाल में बच्चों के भोजन और पोषण के अधिकार पर तीसरा राष्ट्रीय अधिवेशन शाहपुरा स्थित आइकफ आश्रम में चल रहा है। इस तीन दिवसीय आयोजन में 17 राज्यों के करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं, जो भोजन-पोषण से जुड़े अहम मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं। अधिवेशन के दूसरे दिन शनिवार को जनप्रतिनिधियों के सत्र में राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि बुनियादी मुद्दे मुख्यधारा के विमर्श से गायब हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 14-15 वर्षों में टेलीविजन बहसों में भी इन विषयों पर चर्चा कम हुई है। खेड़ा ने चिंता जताई कि देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है, लेकिन पोषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रतिनिधियों ने भी इस बात पर जोर दिया कि खाद्य और पोषण से संबंधित मुद्दे आम चर्चा से बाहर हैं। समानांतर सत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आंगनवाड़ी, मध्यान्ह भोजन, मातृ एवं बाल पोषण, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। चर्चाओं में यह बात सामने आई कि खाद्य और पोषण योजनाओं का असर केवल बजट और सरकारी प्रावधानों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन, जवाबदेही और समुदाय की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। गुजरात से आईं सायरा बानो ने अपने क्षेत्र के दो आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बताई, जो किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों का नियमित संचालन न होने से बच्चों के पोषण पर सीधा असर पड़ रहा है। इस बात पर भी चिंता जताई गई कि एसआईआर में नाम हटाए जाने और उससे अधिकारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई। कई राज्यों के सरपंचों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

