नासिक मंदिर 12 साल में एक बार खुलता है, 31 अक्टूबर से सिम्हस्थ कुंभ मेले के अवसर पर दर्शन नासिक को ‘मंदिरों का शहर’ कहा जाता है। गोदावरी के किनारे चलते हुए इसका अनुभव सीधे होता है, क्योंकि इस क्षेत्र में सैकड़ों मंदिर हैं। इनमें सिम्हस्थ गंगा गोदावरी मंदिर भी शामिल है, जिसका सिम्हस्थ कुंभ मेले से सीधा संबंध है। गोदावरी के तट पर हर 12 साल में सिम्हस्थ कुंभ मेला आयोजित होता है और यह मंदिर केवल उसी अवधि में दर्शन के लिए खुलता है। कुंभ उत्सव समाप्त होने के बाद इसे फिर बंद कर दिया जाता है। कुंभ मेले का ध्वजारोहण समारोह 31 अक्टूबर की दोपहर होगा। इस अवसर पर साधु और महंत जल अभिषेक तथा ध्वजारोहण करेंगे, जिसके बाद सिम्हस्थ गंगा गोदावरी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर रामतीर्थ यानी रामकुंड के उत्तर में स्थित है। इसे भारत का ऐसा एकमात्र मंदिर माना जाता है, जिसकी परंपरा लगभग 700 साल पुरानी है। यह पत्थर से बना मंदिर है, जिसमें गंगा और गोदावरी की प्रतिमाएं हैं। यहां गौतम ऋषि, गंगा और गोदावरी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। पहले गौतम ऋषि की प्रतिमा खुले में थी और धूप तथा बारिश के संपर्क में रहती थी। मंदिर के पुजारी कमलाकर जोशी ने बताया कि 1775 में गोपिकाबाई द्वारा इस स्थान पर सभा मंडप बनवाने के बाद प्रतिमाओं को सुरक्षित किया गया। कुंभ मेले की तैयारियों के तहत पूरे रामकुंड क्षेत्र का रूपांतरण किया जा रहा है। इसी क्रम में मंदिर का फर्श बदला गया है। रंग-रोगन और पानी के रिसाव को रोकने का काम पूरा हो चुका है। मंदिर में ध्वजारोहण की उचित व्यवस्था और ऊपर-नीचे जाने के लिए लोहे की सीढ़ी का काम अभी बाकी है। कुंभ मेले के लिए देशभर से आने वाले साधु और महंत अपने-अपने क्षेत्रों का जल लाकर अभिषेक करेंगे। इसके बाद ध्वजारोहण होगा और फिर मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। कुंभ मेले की अवधि को छोड़कर मंदिर बंद रहता है, हालांकि मंदिर के बाहर देवी की पादुकाओं की पूजा नियमित रूप से जारी रहती है। सिम्हस्थ ध्वजारोहण से पहले गोदावरी का जलस्तर बढ़ गया; रात के समय गंगापुर बांध से पानी छोड़ा गया। पुजारी जोशी ने बताया कि गंगा दशहरा और त्रिपुरी पूर्णिमा (देव दिवाली) के दो दिनों में मंदिर सुबह पूजा-अर्चा और उत्सव के लिए खोलकर रात 12 बजे बंद कर दिया जाता है। इस मंदिर का कुंभ मेले से सीधा संबंध है। ध्वजारोहण के लिए मुख्य स्तंभ इसी मंदिर के पास स्थापित करने पर जोर दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मंदिर ने सैकड़ों वर्षों से गोदावरी की बाढ़ का सामना किया है। पुजारी के अनुसार, गर्भगृह इस तरह बनाया गया है कि नदी का पानी कितने भी दिनों तक रहे, प्रतिमा को घिसाव या किसी अन्य नुकसान का सामना न करना पड़े। दिशासूचक बोर्डों की जरूरत: रामकुंड क्षेत्र में कई अन्य मंदिर हैं, जिनके नाम गंगा गोदावरी से मिलते-जुलते हैं। इससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं में भ्रम पैदा होता है। इस क्षेत्र में रामकुंड के पास अरुणा संगम पर गंगा गोदावरी पंचकोटी मंदिर भी है। इसके अलावा प्राचीन गोदावरी मंदिर भी स्थित है। ये मंदिर पूरे वर्ष श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं। कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में सिम्हस्थ गंगा गोदावरी मंदिर के लिए दिशासूचक बोर्ड लगाने की मांग की गई है, ताकि श्रद्धालुओं का भ्रम दूर हो सके।
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सिम्हस्थ कुंभ: 12 साल बाद खुलेगा गंगा गोदावरी मंदिर
30 अक्टूबर 2026 को 11:24 pm बजे

सिम्हस्थ कुंभ: 12 साल बाद खुलेगा गंगा गोदावरी मंदिर
