मध्य प्रदेश सरकार अपने पुराने आबकारी कानून में एक बड़ा संशोधन करने जा रही है। इस प्रस्तावित बदलाव का मुख्य उद्देश्य आबकारी नियमों को सख्ती से लागू करना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और जब्ती, पेनल्टी व जुर्माने के खिलाफ अपील की स्पष्ट व्यवस्था बनाना है। इसके साथ ही, कानून के उन प्रावधानों को हटाने की तैयारी है जो समय के साथ अप्रासंगिक हो चुके हैं और जिनसे सरकार को लंबे समय से कोई राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। आबकारी विभाग की टीम संशोधन से संबंधित ड्राफ्ट तैयार करने में तेजी से जुटी हुई है। ड्राफ्ट तैयार होने के बाद इसे परीक्षण के लिए वित्त और गृह विभाग को भेजा जाएगा, जिसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम-1915 लागू है, जिसे अंग्रेजी शासनकाल में बनाया गया था। समय के साथ इसकी कई धाराएं और प्रावधान अप्रासंगिक हो चुके हैं। इनमें कुछ ऐसे प्रावधान भी शामिल हैं जिनसे सरकार को पिछले कई वर्षों से कोई राजस्व नहीं मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर ताड़ी और डोडा चूरा से संबंधित प्रावधानों से अब राजस्व न मिलने के कारण संबंधित धाराओं को हटाने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य कानून को मौजूदा परिस्थितियों के अनुकूल बनाना है। नए कानून में सबसे अहम बदलावों में से एक 'अपील की व्यवस्था' शुरू करना होगा। वर्तमान में जिन लोगों की शराब या वाहन जब्त किए जाते हैं अथवा जिन पर आबकारी विभाग जुर्माना या पेनल्टी लगाता है, उनके लिए अपील सुनने वाली कोई स्पष्ट अथॉरिटी मौजूद नहीं है। इस प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से अपील के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे प्रभावित लोगों को विभागीय कार्रवाई के खिलाफ अपील करने का स्पष्ट कानूनी मार्ग मिल सके। प्रस्तावित संशोधन में आबकारी टीमों द्वारा की जाने वाली तलाशी की कार्रवाई को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत तलाशी के नतीजों को रिकॉर्ड करने और संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट देने की औपचारिक व्यवस्था बनाई जाएगी। मौजूदा कानून में अधिकारियों के लिए किसी स्थान पर तलाशी के बाद उसके नतीजों की रिपोर्ट जिला प्रशासन या अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों को देना अनिवार्य नहीं था। इस बदलाव से कार्रवाई की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में सितंबर में सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब की घटना में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यह घटना आबकारी कानूनों में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। प्रदेश में जहरीली शराब से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में वर्ष 2020 से अब तक 80 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जो गंभीर चिंता का विषय है। मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम-1915 प्रदेश में मादक पदार्थों के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और उपभोग को नियंत्रित करने वाला मुख्य कानून है। इसमें जहरीली शराब से जुड़े अपराधों के लिए सख्त दंड का प्रावधान है, जिसमें आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक शामिल हो सकता है। अधिनियम की धारा 54-ए के तहत बिना वारंट गिरफ्तारी के अधिकार भी दिए गए हैं। यह अधिनियम महुआ जैसी पारंपरिक शराब के उत्पादन और बिक्री के लिए भी नियम निर्धारित करता है। वर्ष 2021 में किए गए संशोधन के बाद, जहरीली शराब से मौत होने पर दोषी को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही, न्यूनतम 20 लाख रुपए तक के भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, बिना लाइसेंस के शराब की बिक्री या निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में शराब के कब्जे जैसे विभिन्न उल्लंघनों के लिए भी जुर्माने और कारावास का प्रावधान है। यह कानून प्रदेश में शराब से संबंधित गतिविधियों पर नियंत्रण रखने और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कानून में संशोधन का एक प्रमुख कारण यह भी है कि कुछ प्रावधान समय के साथ पूरी तरह से अप्रासंगिक हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर, ताड़ी और डोडा चूरा से संबंधित कुछ धाराएं अब सरकार के लिए राजस्व का स्रोत नहीं रह गई हैं। इन धाराओं को हटाने से कानून को अधिक सुसंगत और प्रासंगिक बनाने में मदद मिलेगी।
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मध्य प्रदेश का 111 साल पुराना आबकारी कानून होगा अपडेट, सरकार कर रही बड़ा संशोधन
13 अक्टूबर 2026 को 11:47 pm बजे

मध्य प्रदेश का 111 साल पुराना आबकारी कानून होगा अपडेट, सरकार कर रही बड़ा संशोधन
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