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मध्य प्रदेश में शासकीय सेवकों को मिशन कर्मयोगी के तहत ऑनलाइन प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इस निर्देश के अनुसार, राज्य के सभी विभागाध्यक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन कार्यरत सभी पंजीकृत आईजीओटी (इन्तेग्रतेद गोवेर्न्मेन्त ओन्लिने त्रैनिन्ग) यूजर्स प्रत्येक माह कम-से-कम 1 घंटे का प्रशिक्षण पूरा करें। यह पहल राज्य में मिशन कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन और अखिल भारतीय रैंकिंग में मध्य प्रदेश को सर्वोच्च स्थान दिलाने के उद्देश्य से की जा रही है। विभाग ने इस कार्य के लिए कर्मियों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने पर भी विशेष बल दिया है। आईजीओटी प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए, सामान्य प्रशासन विभाग ने कलेक्टर, कमिश्नर सहित सभी विभागाध्यक्षों को और अधिक प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रशिक्षण का लाभ सभी तक पहुंचे, प्रत्येक विभाग को अपने कार्यक्षेत्र में संबंधित महत्वपूर्ण विषयों और क्षेत्रों की पहचान करनी होगी। इसके बाद, उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त विषय विशेषज्ञों (सुब्जेच्त मत्तेर एक्ष्पेर्त्स - एसएमई) का नामांकन भी करना होगा। यह कदम प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने में मदद करेगा। प्रशिक्षण की नियमित समीक्षा सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा की जाएगी। संबंधित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, और विभागाध्यक्ष समय-सीमा की बैठकों में इसकी प्रगति का जायजा लेंगे। इसके साथ ही, विभागीय एमडीओ/नोडल ऑफिसर को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रम सुचारू रूप से चलता रहे। यह व्यवस्था प्रशिक्षण की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने और किसी भी बाधा को दूर करने में सहायक होगी। मिशन कर्मयोगी के नोडल अधिकारी पंकज कुमार राय, जो व्यवहार विज्ञान के प्राध्यापक हैं, ने सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने पंजीकृत आईजीओटी यूजर्स की समीक्षा करेगा और निष्क्रिय उपयोगकर्ताओं की पहचान कर उन्हें पुनः सक्रिय करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाया जा सके और शासकीय सेवक अपनी क्षमता का पूर्ण विकास कर सकें। वर्तमान में मध्य प्रदेश में कुल 01 लोकसेवकों की संख्या 9,57,038 है।
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