इंदौर (ईएमएस) - एक नजीर निर्णय में, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने बीमा कंपनी को एक नर्स के पति को 1.36 करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश उस महिला नर्स की सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु के बाद क्षतिपूर्ति प्रकरण में सुनाया गया। अधिकरण ने पति को मृतका का एकमात्र आर्थिक आश्रित माना, भले ही वह स्वयं नौकरी करता था। यह स्पष्ट किया गया कि मृतका के सास-ससुर आर्थिक रूप से उस पर निर्भर नहीं थे, क्योंकि उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी उसके पति पर थी। वादी पक्ष के वकील गोविंद आर. मीणा ने बताया कि यह दुर्घटना 4 मार्च 2023 को इंदौर के नौलखा चौराहे पर हुई थी। तेज रफ्तार ट्रक ने पीछे से स्कूटर को टक्कर मार दी थी, जिस पर योगेश सिंह और उनकी पत्नी अनुश्री सवार थे। इस टक्कर से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान अनुश्री की मृत्यु हो गई। दुर्घटना के समय अनुश्री की उम्र 28 वर्ष थी। दुर्घटनाग्रस्त महिला इंदौर के मानसिक चिकित्सालय में नर्स के पद पर कार्यरत थी और प्रतिमाह करीब 36,697 रुपए वेतन पाती थी। उसके पति, योगेश सिंह, सागर मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं और प्रतिमाह 35 हजार रुपए कमाते हैं। योगेश के माता-पिता और भाई-बहन भी उसकी आय पर निर्भर थे। इस आधार पर, अधिकरण ने मृतका के माता-पिता को आर्थिक आश्रित नहीं माना। अधिकरण ने अनुश्री के घरेलू कामों में योगदान का मूल्य 30 हजार रुपए प्रतिमाह जोड़ा। इस राशि को भविष्य की आय और अन्य मदों के साथ मिलाकर कुल मुआवजे की गणना की गई। अधिकरण ने बीमा कंपनी को आदेशित किया कि वह 30 दिनों के भीतर यह मुआवजा राशि प्रदान करे। साथ ही, भुगतान पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह निर्णय मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति के मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर पेश करता है। यह मामला इंदौर से जुड़ा है, जहां इंदौर के नौलखा चौराहे पर हुए हादसे के बाद यह फैसला आया है। अधिकरण के इस निर्णय से बीमा कंपनियों को ऐसे मामलों में मुआवजे की राशि तय करने के लिए एक स्पष्ट दिशा मिली है। प्रकरण की सुनवाई के दौरान, अधिकरण ने सभी संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया। पति को एकमात्र आश्रित मानने और घरेलू योगदान को आर्थिक मूल्य देने के फैसले ने इस मामले को विशिष्ट बना दिया है।
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नर्स की मौत पर पति को आश्रित माना, 1.36 करोड़ मुआवजा आदेश
6 नवंबर 2026 को 11:08 pm बजे
