बिलकिसगंज में अभ्युदय रिसर्च एंड सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष और पराली प्रबंधन के बारे में जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम के दूसरे दिन, विशेषज्ञों ने बताया कि पराली जलाना वायु प्रदूषण को बढ़ाता है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम में सरपंच प्रतिनिधि राजेश जांगड़े, उपसरपंच जुझार सिंह मेवाड़ा, लकी हाड़ा, झनक परमार और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकों और उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त की। राघवेंद्र खेड़ले और जितेश जैन ने बताया कि किसानों को कृषि अपशिष्ट को कचरा समझने के बजाय, उससे कई उपयोगी उत्पाद बनाने की दिशा में सोचना चाहिए। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे कृषि अपशिष्ट का सही प्रबंधन करें। कार्यशाला में किसानों को बताया गया कि कैसे वे कृषि अपशिष्ट से कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट बना सकते हैं। इसके साथ ही, राइस हस्क ऐश का उपयोग भी विभिन्न उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है। ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि फसल अवशेष से पशु आहार तैयार किया जा सकता है, जो उनके पशुधन के लिए लाभकारी होगा। इस प्रकार, कृषि अपशिष्ट को सही तरीके से प्रबंधित करना न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि किसानों के लिए भी आय के नए अवसर पैदा कर सकता है। कार्यशाला में बायोमास ब्रिकेट्स और पेलेट्स बनाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। गेहूं और चावल के छिलकों का उपयोग करके ईंधन के विकल्प तैयार किए जा सकते हैं। यह उपाय न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार कर सकता है। खेड़ले ने कहा कि उचित प्रबंधन से वायु प्रदूषण कम किया जा सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा। उन्होंने किसानों को प्रेरित किया कि वे पराली जलाने के बजाय इसके प्रबंधन पर ध्यान दें। कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों ने इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारी उनके लिए बहुत उपयोगी है। वे अपनी फसल अवशेषों को सही तरीके से प्रबंधित करने के लिए तैयार हैं। संस्थान ने यह सुनिश्चित किया कि किसानों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि प्रायोगिक रूप से भी सिखाया जाए। विभिन्न तकनीकों को प्रदर्शित किया गया ताकि किसान उन्हें अपने खेतों में लागू कर सकें।
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किसानों को पराली जलाने के बजाय रोजगार के अवसर बनाने की सलाह
28 सितंबर 2026 को 11:04 pm बजे

किसानों को पराली जलाने के बजाय रोजगार के अवसर बनाने की सलाह
