अधिक कमाई की उम्मीद में उज्जैन के होटल में सफाई के लिए गए चार युवकों की सीवर चैंबर में दम घुटने से मौत, चार घर मातम में डूब गए
उज्जैन के गंगा होटल में 31 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे सफाई के दौरान चारों युवकों की दम घुटने से मौत, बचाने उतरे दो लोगों की भी बिगड़ी हालत, करीब 90 मिनट चला बचाव अभियान
उज्जैन के एक होटल में दिवाली से पहले अधिक कमाई की उम्मीद में गए चार युवकों की सीवर चैंबर में दम घुटने से मौत हो गई। यह चारों युवक अलग-अलग परिवारों से थे और अपनी आर्थिक तंगी दूर करने तथा त्योहार को बेहतर ढंग से मनाने के लिए अतिरिक्त काम कर रहे थे। इस दुखद घटना ने चार घरों में मातम फैला दिया है, जहाँ दिवाली की खुशियों की जगह अब सिर्फ सूनापन और गम है। घटना 31 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे उज्जैन के एक होटल में हुई। सफाई के दौरान चारों युवक एक के बाद एक सीवर चैंबर के अंदर उतरते गए और जहरीली गैस के कारण उनका दम घुटने लगा। उन्हें बचाने के प्रयास में उतरे दो अन्य लोगों की भी तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। करीब 90 मिनट तक चले बचाव अभियान के बाद चारों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मृतकों में तीन सफाईकर्मी और एक होटल सुपरवाइजर शामिल था। मृतक कमलेश तंबोली की 4 साल की बेटी अब अपने पिता के साये से वंचित हो गई है। कमलेश मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था और दिवाली के खर्चों तथा बेटी के भविष्य के लिए अतिरिक्त पैसे कमाने की जुगत में था। उसकी मौत से परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वाहिद खान, जो ग्लोबल हॉस्पिटल में सफाई मित्र के रूप में कार्यरत था, लगभग 12 हजार रुपए महीने की तनख्वाह में अपने चार बच्चों का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहा था। अस्पताल की ड्यूटी पूरी करने के बाद वह अतिरिक्त काम के लिए निकल जाता था। उसके असमय निधन से पत्नी और बच्चों के सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। होटल सुपरवाइजर मनोज मीणा भी इस हादसे का शिकार हो गए। वह उज्जैन में 2021 से नौकरी कर रहा था। 29 अक्टूबर को वह अपने पिता से मिलने भुरमंडा गांव गया था और दो दिन परिवार के साथ बिताने के बाद 30 अक्टूबर को वापस लौटा था। परिवार के लिए यह आखिरी मुलाकात साबित हुई। चौथा युवक नितिन, जो नगर निगम में सफाई कर्मचारी था, कम वेतन के कारण अतिरिक्त काम करता था। अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वह दिन-रात मेहनत करता था, लेकिन इस हादसे ने उसकी जिंदगी भी छीन ली। उसके परिवार को अब उसके बिना आगे की जिंदगी बिताने के दर्द से गुजरना होगा। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी सत्यनारायण चौहान ने स्पष्ट किया कि होटल प्रबंधन ने सफाई के लिए नगर निगम से कोई रसीद नहीं कटवाई थी।

