केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक योजना के बेहतर क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। यह डिजिटल कृषि व्यवस्था किसानों को सही समय पर मदद पहुंचाने का आधार है। इसके तहत 1.20 करोड़ से अधिक किसानों की आईडी बनाई गई है और करीब 4 करोड़ से अधिक खेतों का जियो रेफरेंस सर्वे पूरा हो चुका है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने किसानों के व्यापक हित में भावांतर योजना लागू की है, जिसके अंतर्गत किसान कल्याण वर्ष में सरसों और सोयाबीन के लिए यह योजना चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार किसानों के समग्र कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित है, जिसका उद्देश्य खेती को समृद्ध बनाकर किसानों की आय बढ़ाना है। किसानों के हित में राज्य शासन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उड़द की खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जा रहा है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत 15 जिलों के 4000 किसानों से 3000 मीट्रिक टन श्रीअन्न खरीदा गया है। इस उपार्जन के साथ ही, प्रति क्विंटल 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी किसानों को किया गया है। कृषि उर्वरक वितरण और आपूर्ति के लिए 'ई-विकास' प्रणाली का उपयोग पूरे देश में पहली बार मध्य प्रदेश में किया गया है। इस व्यवस्था से 48.34 पात्र किसानों को 34.46 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया। इससे लगभग 3.94 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बचत हुई, जिसके परिणामस्वरूप 764.65 करोड़ रुपये के उर्वरक अनुदान की भी बचत हुई। किसानों के लिए मंडियों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 में किसानों को 18.52 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का वितरण किया गया।
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केंद्र की एग्रीस्टैक योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश प्रथम, किसानों को मिल रहा है बड़ा लाभ
1 नवंबर 2026 को 10:51 pm बजे
