दमोह निवासी फहद ने टीबी को हराकर फिर से हॉकी के मैदान में कदम रखा है। टीबी के कारण उन्हें खेल से दूर रहना पड़ा था, लेकिन अब वह फिर से अपने पसंदीदा खेल का आनंद ले पा रहे हैं। फहद कहते हैं, "टीबी के कारण जो खेल मुझसे छूट गया था, आज उसे फिर खेल पा रहा हूं। " फहद ने नियमित दवाएं लीं और अपना पूरा इलाज कराया। उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी और समय पर जांच कराकर उपचार लिया। उनका मानना है कि समय पर जांच और पूरा उपचार लेकर टीबी से ठीक हुआ जा सकता है। टीबी की बीमारी के बाद फहद को कमजोरी महसूस हुई थी, जिसके कारण उन्हें हॉकी छोड़नी पड़ी थी। लेकिन अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और फिर से पूरे जोश के साथ हॉकी खेल रहे हैं। फहद की जिंदगी अब सामान्य हो गई है। फहद प्रधानमंत्री के टीबी-मुक्त भारत के संकल्प का समर्थन करते हैं। वह कहते हैं, "हम सभी अपनी भूमिका निभाएं, खुद जागरूक हों और दूसरों को भी टीबी के प्रति जागरूक करें। " उनका संदेश है कि टीबी मरीज घबराएं नहीं, दवा नियमित लें और इलाज बीच में न छोड़ें। फहद ने अपने अनुभव से सीखा है कि किसी परेशानी पर या स्वास्थ्यकर्मी से जरूर बात करनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे लोग अपनी सेहत को लेकर जागरूक हो सकते हैं और सही समय पर उपचार ले सकते हैं। टीबी से लड़ाई में फहद की सफलता एक प्रेरणा है। वह यह संदेश फैलाना चाहते हैं कि टीबी हारेगा, देश जीतेगा। टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है ताकि लोग इस बीमारी से न डरें। फहद की कहानी यह दर्शाती है कि सही समय पर इलाज और जागरूकता से बड़ी बीमारी पर जीत हासिल की जा सकती है।
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फहद ने टीबी को हराया, हॉकी में लौटे
29 सितंबर 2026 को 10:59 pm बजे

फहद ने टीबी को हराया, हॉकी में लौटे
