भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित एक प्रदर्शनी में अपराध स्थल से लेकर न्यायालय तक की वैज्ञानिक जांच और पुलिस की कार्यप्रणाली को सजीव प्रस्तुतियों के माध्यम से समझाया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आमजन को नवीन न्याय संहिताओं के प्रावधानों और अपराध की सूचना से लेकर अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को सरल, रोचक और व्यावहारिक रूप में समझाना था। प्रदर्शनी में फॉरेंसिक विज्ञान की विभिन्न शाखाओं, जैसे डीएनए, बैलिस्टिक्स, टॉक्सिकोलॉजी और वॉयस एनालिसिस में होने वाले वैज्ञानिक परीक्षणों का प्रदर्शन किया गया, जिससे विद्यार्थियों और युवा आगंतुकों को सीखने का अनुभव मिला। प्रदर्शनी में यह दर्शाया गया कि अपराध के बाद पुलिस किस प्रकार घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करती है, उन्हें फॉरेंसिक प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजती है, रिपोर्ट तैयार करती है और आगे की कानूनी कार्रवाई करती है। सजीव मंचन के माध्यम से यह भी समझाया गया कि कैसे मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट या फॉरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्यों का दस्तावेजीकरण और संग्रह करते हैं। इसके अतिरिक्त, ए-फ़ोरेन्सिच 2.0 प्रणाली के डिजिटल संधारण और पुलिस व न्यायालय को रिपोर्ट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को भी नाट्य प्रस्तुति द्वारा स्पष्ट किया गया। वैज्ञानिक साक्ष्य केवल जांच को दिशा देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूत बनाते हैं। यह संदेश प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से दिया गया। मध्य प्रदेश में विकसित फॉरेंसिक जांच व्यवस्था के तहत सभी जिलों में उपलब्ध मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स की भूमिका को भी प्रदर्शित किया गया।
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पुलिस प्रदर्शनी में दिखे वैज्ञानिक साक्ष्य और जांच प्रक्रिया
6 अक्टूबर 2026 को 10:24 pm बजे

पुलिस प्रदर्शनी में दिखे वैज्ञानिक साक्ष्य और जांच प्रक्रिया
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