किशोरी के पिता महाराष्ट्र में मजदूरी करते हैं, वन विभाग ने सहायता राशि देने की प्रक्रिया शुरू की
शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र में तगावर गांव के बिजाहरा टोला में एक 15 वर्षीय किशोरी को तेंदुए ने सोते समय उठा लिया। यह घटना घर के बाहर परछी पर हुई, जहां वह अपनी बहन के साथ सो रही थी। सुबह करीब चार बजे जब बहन की नींद खुली तो सरस्वती सिंह गोंड बिस्तर पर नहीं मिली। मां को जगाने के बाद दोनों ने उसकी तलाश शुरू की। घर से कुछ दूरी पर कंबल मिला, जबकि करीब 300 मीटर दूर झाड़ियों में उसका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और वन विभाग तथा पुलिस की टीमें तेंदुए की तलाश में जुटी हुई हैं। जानकारी के अनुसार, सरस्वती अपनी मां और बहन के साथ घर में सो रही थी, लेकिन घर का दरवाजा नहीं लगा था। इसी का फायदा उठाकर तड़के तेंदुआ घर में घुस आया और सरस्वती को दबोचकर ले गया। सुबह घटना का पता चलने पर ग्रामीणों ने तुरंत ब्यौहारी पुलिस को सूचना दी। संवेदनशील मामला होने के कारण थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। आसपास के थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। एसडीओपी सहित पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना कर जांच शुरू कर दी है। जंगली जानवर के हमले की पुष्टि होने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। डीएफओ तरुणा वर्मा ने बताया कि यह इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है और घर में दरवाजा न होने के कारण तेंदुआ आसानी से अंदर घुस आया। उन्होंने यह भी बताया कि मृतका के पिता शिवचरण महाराष्ट्र में मजदूरी करते हैं और घर में सिर्फ मां और दो बेटियां ही थीं। वन विभाग नियमानुसार मिलने वाली सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कर रहा है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश और भय व्याप्त है। लगभग 300 ग्रामीण तेंदुए की तलाश में जुटे हुए हैं। वन विभाग और पुलिस की कई टीमें लगातार आसपास के जंगलों और संभावित ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। तेंदुए के आतंक से सहमे ग्रामीण अपने घरों से निकलने में भी डर रहे हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और रात में अकेले बाहर न निकलने की सलाह दी है। यह घटना जंगली जानवरों के मानव बस्तियों में बढ़ते अतिक्रमण और हमलों की ओर इशारा करती है। पिछले कुछ समय से जिले में जंगली जानवरों, खासकर तेंदुओं की सक्रियता बढ़ी है, जिससे लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे तेंदुए को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन घने जंगल और तेंदुए की फुर्ती के कारण यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य बना हुआ है। हालांकि, इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं। घर में दरवाजा न होना एक बड़ी लापरवाही मानी जा रही है, जिसके कारण एक मासूम की जान चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग को इस इलाके में गश्त बढ़ानी चाहिए और जंगली जानवरों को आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। फिलहाल, तेंदुए का पता नहीं चल सका है और गांव में भय का माहौल बना हुआ है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें लगातार खोजबीन कर रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक और उससे निपटने के लिए प्रभावी उपायों की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
