बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने किसानों को किया संबोधित, प्राकृतिक खेती संग पशुपालन, मत्स्य पालन अपनाने का आग्रह
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बालाघाट जिले को नक्सलवाद से मुक्ति मिलने के बाद यहां के विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर खेती-किसानी को आगे बढ़ाएंगे और किसानों की आय बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। बालाघाट जिला खनिज संपदा से समृद्ध है, जहां देश का 80 प्रतिशत मैंगनीज निकलता है और मलाजखंड में तांबे का विशाल भंडार है। जिले का चिन्नौर चावल विदेशों तक निर्यात होता है और यह जिले के किसानों की मेहनत का प्रमाण है, जो धान के साथ-साथ कोदो-कुटकी का भी उत्पादन करते हैं। बालाघाट जिला अकेले 60 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन करता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 01 नवंबर को कृषि उपज मंडी, गोंगलई में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने किसानों के कल्याण, कृषि के आधुनिकीकरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए, उन्होंने किसानों को प्रदेश स्थापना दिवस एवं दीपावली पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने जिले के प्रगतिशील किसानों से संवाद कर उनके अनुभव भी जाने और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सके। किसानों को समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के लिए पंजीयन कराने की अंतिम तिथि 04 नवंबर तक बढ़ा दी गई है, क्योंकि बालाघाट जिले के कुछ किसानों का पंजीयन छूट गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

