सीहोर में श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान-दान कर पितरों को करेंगे तर्पण
इस वर्ष शनिश्चरी सर्व पितृमोक्ष अमावस्या का दुर्लभ संयोग 10 अक्टूबर को हस्त नक्षत्र में पड़ रहा है। गरुण पुराण के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान पूर्वज सूक्ष्म रूप में पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं। वंशजों द्वारा अर्पित जल, अन्न और श्रद्धा ग्रहण कर वे सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार, यह अवसर उन पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है। इस दुर्लभ संयोग के चलते जिलेभर में श्रद्धालु मां नर्मदा, पार्वती तट व सिवन घाट सहित अन्य प्रवाहमान नदियों पर स्नान-दान और पूजा-अर्चना कर पितरों को जल अर्पित करेंगे। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्रत्येक मनुष्य पर देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण होते हैं। पितृपक्ष इन ऋणों से मुक्ति पाने और पूर्वजों के प्रति आभार जताने का पावन अवसर है। पंडित सुनील शर्मा बताते हैं कि जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध तर्पण पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन किया जाता है। इस वर्ष यह अमावस्या शनिवार को हस्त नक्षत्र में पड़ रही है, जो इसे और भी विशेष बना रही है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार, इस अवधि में श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त तिल, कुश के माध्यम से जल अर्पित कर तर्पण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ब्राह्मण भोजन, अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा और जरूरतमंदों की सहायता करना भी महत्वपूर्ण है। पूर्वजों की आत्मा की शांति और सद्गति के लिए श्रीमद्भागवत कथा, पितृ भागवत व पितृ सूक्त का पाठ करवाना भी फलदायी होता है। न्याय के देवता भगवान शनिदेव को नवग्रहों में न्यायाधीश का दायित्व प्राप्त है और वे कर्मफल दाता कहलाते हैं। इसलिए, साढेसाती से पीड़ित जातकों के लिए शनिश्चरी अमावस्या पर शिवशक्ति, हनुमानजी और शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होगी। शनि मंत्र जाप, हवन-पूजन और छायादान करना चाहिए। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों तेल, तिल तेल से अभिषेक करना, काली उड़द, काले तिल, काला कपड़ा, इमरती और नीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही, गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और छाता दान करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों की स्मृति में पीपल, बरगद व फलदार पौधों का रोपण करना चाहिए। पास में दीपक भी लगाना चाहिए। यह कार्य न केवल पूर्वजों को शांति प्रदान करता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है।

