महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि बाल विवाह मुक्त मध्य प्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए शासन, प्रशासन और समाज को मिलकर प्रभावी एवं समन्वित प्रयास करने होंगे। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए तैनात ये अधिकारी केवल कानून के क्रियान्वयनकर्ता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत हैं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीCMए), 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ही बाल विवाह के मामलों में समयबद्ध हस्तक्षेप, समन्वय और संवेदनशील कार्रवाई के लिए सक्षम बनाना है। मध्य प्रदेश में बाल विवाह की रोकथाम को प्रभावी बनाने के लिए 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (च्म्पोस) का व्यापक मैदानी तंत्र तैयार किया गया है। जिला स्तर से लेकर अनुभाग, तहसील, विकासखंड, सेक्टर, ग्राम और नगरीय क्षेत्रों तक इन अधिकारियों की नियुक्ति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर कार्रवाई प्रशासन के किसी दूरस्थ स्तर तक पहुंचने का इंतजार न करे, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही त्वरित हस्तक्षेप संभव हो। बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है, जिसे रोकने के लिए ऐसे अधिकारियों की तैनाती महत्वपूर्ण है। यूनिसेफ के राज्य प्रमुख विलियम हेनलोन जूनियर ने कहा कि किशोरावस्था भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है।
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बाल विवाह मुक्त मध्य प्रदेश के लिए मंत्री निर्मला भूरिया ने शासन-प्रशासन और समाज से किए प्रभावी प्रयास के आह्वान
6 अक्टूबर 2026 को 10:24 pm बजे

बाल विवाह मुक्त मध्य प्रदेश के लिए मंत्री निर्मला भूरिया ने शासन-प्रशासन और समाज से किए प्रभावी प्रयास के आह्वान
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