महाकाल मंदिर में करीब 42 ई-कार्ट में से कई खराब, बची हुई वीआईपी के लिए आरक्षित
रविवार से महाकालेश्वर मंदिर में ई-कार्ट सेवा बंद होने के कारण आम श्रद्धालुओं, खासकर बुजुर्गों और दिव्यांगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब 42 ई-कार्ट में से कई के खराब हो जाने और बची हुई गाड़ियों के वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित कर दिए जाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मंगलवार को कुछ गाड़ियों का संचालन शुरू हुआ, लेकिन वे भी आम लोगों की पहुंच से बाहर रहीं। मंदिर प्रशासन की ओर से इन ई-कार्ट की देखरेख में लापरवाही बरती गई है। चार्जिंग के दौरान तकनीकी खराबी आने से कई गाड़ियां बंद पड़ गईं। महाकालेश्वर मंदिर समिति की उप प्रशासक सिम्मी यादव ने स्वीकार किया कि चार्जिंग के दौरान कुछ गाड़ियों में तकनीकी दिक्कत आई थी, जिससे यह समस्या पैदा हुई। इन गाड़ियों को ठीक कराने का काम मंगलवार से शुरू किया गया है, लेकिन समस्या का समाधान कब तक होगा, यह स्पष्ट नहीं है। महाकाल मंदिर में ई-कार्ट सेवा का संचालन त्रिवेणी संग्रहालय द्वार, नीलकंठ द्वार और हरसिद्धि द्वार से होता है। ये ई-कार्ट विशेष रूप से बुजुर्ग, दिव्यांग और चलने-फिरने में असमर्थ श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए हैं। इन्हें तीन पालियों में 12-12 गाड़ियों के स्लॉट में चलाया जाता है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके। हालांकि, वर्तमान में जो गाड़ियां चल रही हैं, उनमें से अधिकांश वीआईपी और वीवीआईपी श्रद्धालुओं की सेवा में लगा दी गई हैं। इस कारण आम श्रद्धालुओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उज्जैन सांसद भी इस व्यवस्था पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि ई-कार्ट की सुविधा आम श्रद्धालुओं के बजाय केवल वीआईपी भक्तों को मिल रही है, जो कि अनुचित है। सांसद ने मंदिर प्रशासक से इस संबंध में चर्चा भी की थी और व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया था। उनका कहना था कि मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को समान सुविधा मिलनी चाहिए, खासकर उन लोगों को जिन्हें चलने-फिरने में कठिनाई होती है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने पहले भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी। गर्मी और उमस के बीच लंबी दूरी पैदल चलना श्रद्धालुओं के लिए बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है।

