दमोह में 'सुरक्षित बचपन अभियान' के राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मिली महत्वपूर्ण जानकारी
जागरूकता सत्र हुए संपन्न
प्रधान जिला न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने कहा कि 'सुरक्षित बचपन अभियान' के अंतर्गत 'उड़ान' थीम पर आयोजित राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशों के तहत मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई, ताकि वे किसी भी अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में चुप न रहें और अपने अभिभावक, शिक्षक या संबंधित प्राधिकारी को सूचित करें। यह राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दमोह के प्रशिक्षण हॉल में आयोजित हुआ, जहाँ छात्र-छात्राओं ने योउतुबे लाइव प्रसारण के माध्यम से कार्यक्रम देखा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक, जिला अनूपपुर में न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया ने उपस्थित छात्र- छात्राओं को नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) द्वारा संचालित बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवायें योजना, 2024, निःशुल्क विधिक सहायता, बाल विवाह, शिक्षा का अधिकार, अपराध पीड़ित प्रतिकर और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने इन योजनाओं के माध्यम से बच्चों को मिलने वाले कानूनी अधिकारों और सहायता के बारे में समझाया।
यह 'उड़ान' थीम पर आधारित 'सुरक्षित बचपन अभियान' बच्चों को सशक्त बनाने और उन्हें उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रावधानों को सरल भाषा में समझाकर बच्चों को शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह अभियान सुनिश्चित करता है कि बच्चे सुरक्षित महसूस करें और उन्हें आवश्यक सहायता मिल सके। कार्यक्रम के अंत में, विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
