प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों के आधे से अधिक पद रिक्त हैं, जिससे शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है
मध्य प्रदेश में सरकारी कॉलेजों में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू, पर शिक्षक नदारद
भोपाल। मध्य प्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। इस नीति के तहत उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर दिलाने के उद्देश्य से कई व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। हालांकि, सरकारी महाविद्यालयों में इन पाठ्यक्रमों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों के आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं। कुल 12,895 स्वीकृत पदों में से 7,078 पद खाली हैं, जबकि केवल 5,817 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की इस भारी कमी के कारण प्रदेश की शैक्षणिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि कई महाविद्यालयों में मुख्य विषयों के साथ-साथ रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के लिए भी पढ़ाने वाले शिक्षक मौजूद नहीं हैं। सरकार एक ओर नई शिक्षा नीति के माध्यम से कौशल आधारित और रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई के लिए जरूरी विशेषज्ञ शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इस कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। चूंकि योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कई विषयों में छात्र बिना प्रैक्टिकल किए ही पाठ्यक्रम पूरा करने को मजबूर हैं। यह न केवल उनकी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि भविष्य में उनके रोजगार के अवसरों को भी सीमित कर सकता है। प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में बायोटेक्नोलॉजी, बिजनेस मैनेजमेंट, बिजनेस स्टैटिस्टिक्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन, धर्मशास्त्र, कंप्यूटर साइंस, इंटीरियर डिजाइनिंग, माइक्रोबायोलॉजी, एमसीए, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, इलेक्ट्रानिक्स, एनवायर्नमेंटल साइंस, फैशन डिजाइनिंग, फाइनेंस और बायोकेमिस्ट्री जैसे कई महत्वपूर्ण विषय ऐसे हैं, जिनमें एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। ये सभी विषय वर्तमान समय में रोजगार और व्यावसायिक शिक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनकी पढ़ाई के लिए विशेष ज्ञान और कौशल की आवश्यकता होती है, लेकिन शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण छात्रों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा साबित हो रही है। शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा हर साल भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। हालांकि, जितने पद खाली हैं, उन सभी पर भर्ती नहीं हो पा रही है। जितने पद खाली हैं, उन पर अतिथि विद्वानों को पदस्थ किया जा रहा है। प्रदेश में करीब साढ़े चार हजार अतिथि विद्वान वर्तमान में कार्यरत हैं, जो एक अस्थायी समाधान है और स्थायी शिक्षकों की कमी को पूरी तरह से दूर नहीं कर पाता। उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने इस मुद्दे पर कहा है कि भर्ती प्रक्रिया निरंतर जारी है। उन्होंने स्वीकार किया कि खाली पदों पर अतिथि विद्वानों को नियुक्त किया जा रहा है। सरकार द्वारा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के बावजूद, शिक्षकों की अनुपलब्धता एक विरोधाभास पैदा करती है।

