भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में समर्थ सिंह की डिफ़ॉल्ट ज़मानत याचिका खारिज कर दी। यह याचिका अभिनेत्री त्विशा शर्मा की मौत के मामले में दायर की गई थी। कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की दलीलों को स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया कि चालान पेश होने और अदालत द्वारा संज्ञान लेने के बाद, डिफ़ॉल्ट ज़मानत का अधिकार समाप्त हो जाता है। समर्थ सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने दलील दी थी कि सीबीआई ने चालान तो पेश कर दिया है, लेकिन जांच को जानबूझकर अधूरा रखा गया है ताकि उनके मुवक्किल को ज़मानत से वंचित रखा जा सके। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि डिफ़ॉल्ट ज़मानत का आधार जांच को 90 दिनों के भीतर पूरा न करना है। त्विशा शर्मा के माता-पिता की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता अंकुर पांडेय ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि सीबीआई ने निर्धारित 90 दिनों की समय सीमा के भीतर ही चालान पेश कर दिया था और अदालत ने उस पर संज्ञान भी ले लिया है। सीबीआई ने 17 अगस्त को चालान पेश किया था, जिसे अतिरिक्त जिला न्यायाधीश शोभना भलवे की अदालत ने स्वीकार कर लिया था। अदालत के आदेश के अनुसार, यदि जांच एजेंसी चालान प्रस्तुत करती है और अदालत उस पर संज्ञान लेती है, तो कुछ दस्तावेज़ों के दाखिल न होने या कुछ सह-आरोपियों के खिलाफ जांच लंबित रहने के आधार पर चालान को अधूरा नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि जब अदालत चालान का संज्ञान लेती है, तो याचिकाकर्ता को डिफ़ॉल्ट ज़मानत का लाभ लेने का कोई अधिकार नहीं रहता। यह सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी हवाला देता है, जिसमें कहा गया है कि यदि जांच एजेंसी चालान जमा करती है और अदालत संज्ञान लेती है, तो चालान को केवल कुछ दस्तावेज़ों के दाखिल न होने या कुछ सह-आरोपियों के खिलाफ जांच लंबित रहने के आधार पर अधूरा नहीं कहा जा सकता। समर्थ सिंह को 23 मई को गिरफ्तार किया गया था। उनकी डिफ़ॉल्ट ज़मानत याचिका इस आधार पर मांगी गई थी कि उनकी गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर जांच पूरी नहीं हुई थी। हालांकि, सीबीआई ने 17 अगस्त को चालान पेश करके यह साबित कर दिया कि उन्होंने निर्धारित समय सीमा का पालन किया था। इस मामले में जांच अभी भी जारी है।
सीबीआई द्वारा 17 अगस्त को चालान पेश किया गया था, और एडीजे अदालत ने उस पर संज्ञान ले लिया था। यह जानकारी इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

