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यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में मध्य प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों का नामांकन

यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में मध्य प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों का नामांकन
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यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में मध्य प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों का नामांकन
मध्य प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। चार नए ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल किया गया है। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। यह उपलब्धि मध्य प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गिन्नौरगढ़ का किला, जो रातापानी के परिदृश्य में स्थित है, एक स्वदेशी गोंड किलेबंद राजधानी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह किला गोंड साम्राज्य का एक प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र रहा है। इसकी त्रि-स्तरीय स्थानिक व्यवस्था और प्राकृतिक सुरक्षा इसे विशेष बनाती है। इससे पहले, साल 2024 में ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, रामनगर (मंडला) के गोंड स्मारक और धामनार के ऐतिहासिक समूह को भी इस सूची में जोड़ा गया था। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर कार्यक्रम के तहत कई महत्वपूर्ण विरासत संपत्तियों का प्रस्ताव रखा। यह प्रयास प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक है। यूनेस्को की टेंटेटिव सूची उन संपत्तियों की राष्ट्रीय सूची है जिन्हें भविष्य में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की संभावना के रूप में देखा जाता है। इस सूची में शामिल होना एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। भारत की कुल 78 अस्थायी धरोहरों में से 19 मध्य प्रदेश में होना प्रदेश की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाता है। इन स्थलों के माध्यम से क्षेत्रीय शिल्प कौशल और मंदिर रूपों का विकास स्पष्ट होता है। इलैयाराजा टी। ने कहा कि यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में हमारे चार और ऐतिहासिक स्थलों का शामिल होना मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का एक बड़ा प्रमाण है। बाघ गुफाओं के भित्ति चित्र धार जिले में स्थित हैं। ये गुफाएं चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी की हैं और उनकी विशेषता उनके अद्वितीय चित्रों में है। उदयगिरि गुफाएं, विदिशा के पास बेतवा और धसन नदियों के बीच स्थित हैं। यह गुफाएं गुप्त काल की धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति से जुड़ी प्रमुख जीवित पवित्र भू-आकृतियों में से एक हैं। बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में स्थित है। यह समूह प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करता है। इन सभी स्थलों में हिंदू, जैन और अन्य धार्मिक तत्वों की उपस्थिति है। यह मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और अमूर्त धरोहर को उजागर करता है। इस गौरवशाली मान्यता से अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मध्य प्रदेश के पर्यटन को एक नई ऊँचाई मिलेगी। दुनिया भर के सैलानी हमारी अनूठी संस्कृति और इतिहास से गहराई से परिचित हो सकेंगे। ये समस्त अमूर्त परंपराएं मध्य प्रदेश की जीवंत सांस्कृतिक चेतना का गौरवशाली आधार हैं।
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