प्रधान जिला न्यायाधीश संजीव कुमार अग्रवाल ने सीहोर जिला जेल का मासिक निरीक्षण करते हुए बंदियों से उनकी समस्याएं जानीं और उन्हें विधिक अधिकारों व निःशुल्क सहायता के बारे में बताया। उन्होंने जेल की पाकशाला, लीगल एड क्लीनिक, बैरक, स्वास्थ्य सुविधाओं और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया
मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार 31 अक्टूबर को प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव कुमार अग्रवाल ने जिला जेल सीहोर का मासिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल में निरुद्ध बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा उन्हें विधिक अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता के संबंध में जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश अग्रवाल ने बंदियों से उनके प्रकरणों की स्थिति, अधिवक्ता की नियुक्ति, अपील एवं जमानत आवेदन तथा जमानत स्वीकृत होने के बाद भी जेल में निरुद्ध बंदियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं से प्रकरणों की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए पात्र बंदियों को आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रधान जिला न्यायाधीश ने जेल की पाकशाला, लीगल एड क्लीनिक, मुलाकाती लीगल एड हेल्प डेस्क, जेल डिस्पेंसरी, महिला सेल एवं बंदियों के बैरकों का निरीक्षण किया। साथ ही पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता, पोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सकों की उपलब्धता एवं दवाओं की व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने महिला बंदियों सहित सभी बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनुराग सिंह कुशवाह, जिला विधिक सहायता अधिकारी फारूक अहमद सिद्दीकी, जेल अधीक्षक प्रतिभा पटेल, जेलर दिलीप नायक सहित जेल स्टाफ उपस्थित रहा। जिला जेल सीहोर में प्रधान जिला न्यायाधीश संजीव कुमार अग्रवाल के मासिक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों के कल्याण और उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना था। प्राधिकरण के निर्देशानुसार, यह निरीक्षण नियमित रूप से आयोजित किया जाता है ताकि जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा सके और बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता को परखा जा सके। अग्रवाल ने बंदियों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को समझने का प्रयास किया, जिसमें उनके कानूनी मामलों की प्रगति, वकील की उपलब्धता, जमानत संबंधी प्रक्रियाएं और अन्य व्यक्तिगत कठिनाइयां शामिल थीं। इस संवाद से जेल प्रशासन को बंदियों की वास्तविक स्थिति से अवगत होने में मदद मिली और यह सुनिश्चित हुआ कि किसी भी बंदी को उनकी कानूनी या व्यक्तिगत समस्याओं के कारण अनावश्यक कष्ट न उठाना पड़े। अग्रवाल ने विशेष रूप से उन बंदियों पर ध्यान केंद्रित किया जिनकी जमानत स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन वे किन्हीं कारणों से अभी भी जेल में निरुद्ध हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और अधिवक्ताओं से इन मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी ताकि ऐसे बंदियों की रिहाई प्रक्रिया को तेज किया जा सके। यह सुनिश्चित करना कि जमानत मिलने के बाद भी कोई बंदी अनावश्यक रूप से जेल में न रहे, न्याय प्रणाली की निष्पक्षता और दक्षता का प्रतीक है। प्रधान न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि सभी पात्र बंदियों को उनकी आवश्यकतानुसार विधिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिसमें निःशुल्क कानूनी सलाह और प्रतिनिधित्व शामिल है। यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक या सामाजिक स्थिति के कारण किसी को भी न्याय से वंचित न रहना पड़े। निरीक्षण के दौरान, प्रधान जिला न्यायाधीश ने जेल परिसर के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों का गहनता से जायजा लिया। इसमें जेल की पाकशाला शामिल थी, जहाँ भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण मानकों की जांच की गई। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि बंदियों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन मिले। लीगल एड क्लीनिक और मुलाकाती लीगल एड हेल्प डेस्क का निरीक्षण करते हुए, उन्होंने यह परखा कि बंदियों को कानूनी सलाह और सहायता कितनी सुलभ है। जेल डिस्पेंसरी में स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सकों की उपलब्धता और दवाओं के स्टॉक का मूल्यांकन किया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बीमार बंदियों को उचित चिकित्सा देखभाल मिल सके। महिला सेल का निरीक्षण कर महिलाओं बंदियों की विशेष आवश्यकताओं और सुरक्षा का भी जायजा लिया गया। बंदियों के बैरकों का निरीक्षण करते हुए, अग्रवाल ने उनकी रहने की स्थिति, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल की उपलब्धता की जांच की। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि बैरक साफ-सुथरे हों और बंदियों को पर्याप्त रोशनी और स्वच्छ पानी मिले। पोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सकों की उपलब्धता और दवाओं की व्यवस्था का भी विस्तृत मूल्यांकन किया गया। यह सुनिश्चित करना कि जेल के भीतर सभी मूलभूत सुविधाएं, जैसे कि पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल, उचित प्रकाश व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाएं, उपलब्ध हों, जेल प्रशासन की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। प्रधान न्यायाधीश ने इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की ताकि जेल के भीतर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके। प्रधान जिला न्यायाधीश संजीव कुमार अग्रवाल ने जेल के भीतर उपलब्ध कराई जा रही सभी मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली, जिसमें महिला बंदियों को विशेष रूप से दी जा रही सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया। उन्होंने पाया कि जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, लेकिन उन्होंने इन सुविधाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को और बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए। यह निरीक्षण केवल व्यवस्थाओं की जांच तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य जेल प्रशासन को निरंतर सुधार के लिए प्रेरित करना भी था। अग्रवाल ने जेल अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे बंदियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सक्रिय रहें और जेल के भीतर सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। निरीक्षण के दौरान, जिला न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनुराग सिंह कुशवाह भी प्रधान जिला न्यायाधीश के साथ थे। उनकी उपस्थिति ने निरीक्षण की गंभीरता और महत्व को और बढ़ाया। उनकी भागीदारी ने कानूनी सहायता के पहलू को और मजबूत किया।
